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उत्तराखंड: प्रबंधन और कर्मियों की तकरार में 108 एंबुलेंस ठप, कर्मचारियों को बर्खास्त करने की चेतावनी

Thu, 03 Jan 2019 10:10 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
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उत्तराखंड में हड़ताल
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शासन के हस्तक्षेप के बाद जीवीके प्रबंधन और फील्ड कर्मचारियों के बीच हुई वार्ता का कोई नतीजा नहीं निकल पाया। ऐसे में पूरे प्रदेश में दूसरे दिन भी 108एंबुलेंस और खुशियों की सवारी का संचालन ठप रहा। दोपहर बाद वैकल्पिक व्यवस्था के सहारे प्रबंधन ने वाहनों का संचालन शुरू किया। प्रबंधन ने आज काम पर नहीं लौटने वाले कर्मचारियों को बर्खास्त करने की चेतावनी दी है। 

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बृहस्पतिवार को भी 108और खुशियों की सवारी एंबुलेंस सेवा से जुड़े फील्ड कर्मचारी सामूहिक कार्य बहिष्कार पर रहे। दोपहर में सचिवालय में अपर सचिव स्वास्थ्य अरुणेंद्र चौहान ने कर्मचारी नेताओं और 108प्रबंधन की बैठक ली। उन्होंने कहा कि जीवन रक्षक सेवा के कर्मियों के कार्य बहिष्कार पर रहने से प्रदेश की स्वास्थ्य सेवा गड़बड़ा रही है, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने जीवीके प्रबंधन को तुरंत व्यवस्था बहाल करने के निर्देश दिए। प्रबंधन ने कहा कि काम पर लौटने के बाद ही कर्मचारियों की बात सुनी जाएगी। वहीं, कर्मचारियों ने कहा कि वे मांगों पर कार्रवाई होने के बाद ही काम पर लौटेंगे।  

 इसके बाद प्रबंधन ने वैकल्पिक व्यवस्था के सहारे वाहनों का संचालन शुरू किया। 108सेवा के प्रदेश प्रभारी मनीष टिंकू ने बताया कि यूपी व हिमाचल से कुछ कर्मियों की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा दैनिक व्यवस्था पर भी कर्मचारी रखे जा रहे हैं। साथ ही सभी जिलों में सीएमओ स्तर से कुछ कर्मियों की व्यवस्था की गई है। उन्होंने बताया कि शाम तक 40 फीसदी वाहनों का संचालन शुरू कर दिया गया।  
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 कर्मचारियों को नोटिस जारी किया गया है। शुक्रवार सुबह आठ बजे तक काम पर न लौटने वाले कर्मियों को बर्खास्त कर दिया जाएगा। अगले एक हफ्ते के भीतर नए सिरे से कर्मचारियों की भर्ती कर दी जाएगी।  
 - मनीष टिंकू, प्रदेश प्रभारी, 108 सेवा 

सरकार को यह भी देखना चाहिए कि सैकड़ों कर्मचारियों को सामूहिक कार्य बहिष्कार पर जाने की नौबत क्यों आई। कर्मचारी भी इस प्रदेश के लोग हैं, उनकी बात भी सुनी जानी चाहिए। कर्मचारियों के उत्पीड़न के बावजूद सरकार कंपनी का पक्ष ले रही है। हमारी बात नहीं सुनी जाएगी तो हम कार्य बहिष्कार पर ही रहेंगे। 
- विपिन जमलोकी, प्रदेश सचिव, 108 कर्मचारी संघ

धरना-प्रदर्शन से परहेज 

सामूहिक कार्य बहिष्कार पर गए कर्मचारी बृहस्पतिवार को दूसरे दिन भी सामने नहीं आए। दून अस्पताल में पहुंचकर कर्मियों ने आंदोलन की रणनीति जरूर बनाई। हालांकि धरना प्रदर्शन से पूरी तरह परहेज किया। कर्मियों के इस रवैये के पीछे प्रदेश में लागू एस्मा और हाईकोर्ट की सख्ती को कारण माना जा रहा है। 

कर्मियों की प्रमुख मांगें 
 -14 और 15 अगस्त का काटा गया वेतन लौटाया जाए। 
 -प्रत्येक माह की पांच तारीख तक वेतन भुगतान किया जाए। 
 -कर्मचारियों की समस्याओं के समाधान के लिए समिति गठित की जाए।  
 -प्रबंधन कर्मचारी विरोधी नीतियां लागू न करे। 

 जिस एजेंसी के पास संचालन का जिम्मा है, उसका अनुबंध समाप्त होने वाला है। यह मरीजों के जीवन से जुड़ा बिंदु है इसलिए हमने एजेंसी से तुरंत वैकल्पिक व्यवस्था करने को कहा है। एजेंसी कैसे वाहनों का संचालन करेगी, यह सोचना उनका काम है।  
 - अरुणेंद्र चौहान, अपर सचिव, स्वास्थ्य
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दूसरे दिन भी मरीजों ने झेली परेशानी

108 एंबुलेंस और खुशियों की सवारी का संचालन ठप रहने से बृहस्पतिवार को दूसरे दिन भी मरीजों ने खासी दिक्कतें झेलनी पड़ीं। तीमारदार किराये की एंबुलेंस और ऑटो-टैक्सी के जरिये मरीजों को अस्पताल लेकर पहुंचे। विशेषकर गर्भवती महिलाओं और जच्चा-बच्चा को सबसे ज्यादा परेशानी हुई।

बृहस्पतिवार को दूसरे दिन भी बड़ी संख्या में लोगों ने एंबुलेंस व खुशियों की सवारी उपलब्ध कराने के लिए 108 के कंट्रोल रूम में फोन किए। कंट्रोल रूम कर्मियों ने फोन करने वालों को बताया कि फील्ड कर्मचारियों के कार्य बहिष्कार पर होने के कारण ज्यादातर स्थानों पर एंबुलेंस का संचालन नहीं हो पा रहा है। इसके बाद लोग खुद अपने साधनों से मरीजों को अस्पताल लेकर पहुंचे।

गर्भवती महिलाओं को अस्पताल पहुंचाने के लिए खुशियों की सवारी का संचालन किया जाता है। इसी वाहन के जरिये प्रसव के बाद जच्चा-बच्चा को घर भी पहुंचाया जाता है। लेकिन यह वाहन भी पूरी तरह बंद रहे। ऐसे में लोगों ने निजी एंबुलेंस व अन्य साधनों का सहारा लिया।
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