सामूहिक कार्य बहिष्कार पर गए कर्मचारी बृहस्पतिवार को दूसरे दिन भी सामने नहीं आए। दून अस्पताल में पहुंचकर कर्मियों ने आंदोलन की रणनीति जरूर बनाई। हालांकि धरना प्रदर्शन से पूरी तरह परहेज किया। कर्मियों के इस रवैये के पीछे प्रदेश में लागू एस्मा और हाईकोर्ट की सख्ती को कारण माना जा रहा है।
कर्मियों की प्रमुख मांगें
-14 और 15 अगस्त का काटा गया वेतन लौटाया जाए।
-प्रत्येक माह की पांच तारीख तक वेतन भुगतान किया जाए।
-कर्मचारियों की समस्याओं के समाधान के लिए समिति गठित की जाए।
-प्रबंधन कर्मचारी विरोधी नीतियां लागू न करे।
जिस एजेंसी के पास संचालन का जिम्मा है, उसका अनुबंध समाप्त होने वाला है। यह मरीजों के जीवन से जुड़ा बिंदु है इसलिए हमने एजेंसी से तुरंत वैकल्पिक व्यवस्था करने को कहा है। एजेंसी कैसे वाहनों का संचालन करेगी, यह सोचना उनका काम है।
- अरुणेंद्र चौहान, अपर सचिव, स्वास्थ्य
108 एंबुलेंस और खुशियों की सवारी का संचालन ठप रहने से बृहस्पतिवार को दूसरे दिन भी मरीजों ने खासी दिक्कतें झेलनी पड़ीं। तीमारदार किराये की एंबुलेंस और ऑटो-टैक्सी के जरिये मरीजों को अस्पताल लेकर पहुंचे। विशेषकर गर्भवती महिलाओं और जच्चा-बच्चा को सबसे ज्यादा परेशानी हुई।
बृहस्पतिवार को दूसरे दिन भी बड़ी संख्या में लोगों ने एंबुलेंस व खुशियों की सवारी उपलब्ध कराने के लिए 108 के कंट्रोल रूम में फोन किए। कंट्रोल रूम कर्मियों ने फोन करने वालों को बताया कि फील्ड कर्मचारियों के कार्य बहिष्कार पर होने के कारण ज्यादातर स्थानों पर एंबुलेंस का संचालन नहीं हो पा रहा है। इसके बाद लोग खुद अपने साधनों से मरीजों को अस्पताल लेकर पहुंचे।
गर्भवती महिलाओं को अस्पताल पहुंचाने के लिए खुशियों की सवारी का संचालन किया जाता है। इसी वाहन के जरिये प्रसव के बाद जच्चा-बच्चा को घर भी पहुंचाया जाता है। लेकिन यह वाहन भी पूरी तरह बंद रहे। ऐसे में लोगों ने निजी एंबुलेंस व अन्य साधनों का सहारा लिया।