दो दिन से बंद पड़ी जीवनदायिनी ‘108’ और ‘खुशियों की सवारी’ एंबुलेंस सेवा सोमवार से शुरू हो गई। चौतरफा दबाव के बाद राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन ने दोनों सेवाओं का संचालन करने वाली जीवीके ईएमआरआई कंपनी को सोमवार को छुट्टी होने के बावजूद दस करोड़ रुपये का बजट जारी कर दिया।
बकाया भुगतान न मिलने पर पेट्रोल पंप संचालकों ने कंपनी को डीजल देने से हाथ खड़े कर दिए थे। इससे रविवार तक प्रदेश में 108 सेवा की 48 और ‘खुशियों की सवारी’ की 27 एंबुलेंस का संचालन ठप हो गया था। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत प्रदेश में 108 सेवा की एंबुलेंस आपात स्थिति के मरीजों को अस्पताल तक पहुंचाती है।
इसी तरह, खुशियों की सवारी एंबुलेंस पर गर्भवती महिलाओं को घर से अस्पताल और फिर जच्चा-बच्चा को घर तक पहुंचाने का जिम्मा है। उत्तराखंड में इसका संचालन जीवीके ईएमआरआई कंपनी करती है। एंबुलेंस के न चलने से जहां खासकर गर्भवती महिलाओं को अस्पताल तक पहुंचाने में दिक्कत हो रही थी।
वहीं, आपात स्थिति के मरीजों की भी जान पर बन आई थी। बजट जारी न होने पर राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन से लेकर स्वास्थ्य मंत्रालय तक कंपनी से शिकायत की थी। यही वजह थी कि सोमवार को छुट्टी का दिन होने के बावजूद मिशन ने कंपनी को दस करोड़ रुपये का बजट जारी किया। जीवीके ईएमआरआई सेवा के प्रदेश प्रमुख मनीष टिक्कू ने बताया कि बजट जारी होते ही एंबुलेंस में डीजल भराकर संचालन शुरू किया जा रहा है। मंगलवार को सभी एंबुलेंस का संचालन शुरू कर दिया जाएगा।