उत्तरकाशी में मंगलवार देर रात्र तेज बारिश होने से यमुनोत्री हाईवे पर पाली गाड उफान आने से तीन घर बह गए और 250 मीटर हाईवे का हिस्सा बह गया। बताया गया कि दो मकान ढहने के कगार पर हैं। फिलहाल, कोई इस घटना में बहा है या नही इसका पता नहीं लग पाया है।
वहीं बउत्तराखंड के पांच पर्वतीय जिलों में लोगों की मुश्किलें कम होने को नहीं हैं। बरसात के चलते करीब 107 सड़कें अब भी बंद पड़ी हैं। इससे लोगों को 10 से 15 किमी तक का पैदल सफर तय करना पड़ रहा है। उन्हें गैस सिलेंडर भी कंधे पर ढोना पड़ रहा है। उत्तरकाशी जिले में दर्जनों गांवों का तहसील मुख्यालय से संपर्क कटा हुआ है। रुद्रप्रयाग जिले में जरूरी वस्तुओं का संकट पैदा हो गया है।
सड़कों को खोलने में मौसम बना रोड़ा
चमोली जिले में 29 सड़कें अवरुद्ध हैं। सड़कों को खोलने में मौसम रोड़ा बना है। रुक-रुककर हो रही बारिश से सड़कों को खोलने का कार्य प्रभावित हो रहा है। निजमुला, फर्सवाण फाट, बैरासकुंड, घाट और थराली में लंबे समय से सड़कें अवरुद्ध पड़ी हुई हैं। बैरासकुंड क्षेत्र को जोड़ने वाली एकमात्र कांडईपुल-बैरासकुंड सड़क एक जुलाई से बंद है, ग्रामीण करीब आठ किमी पैदल आवाजाही कर रहे हैं। उन्हें गैस सिलेंडर भी कंधे पर ढोना पड़ रहा है।
बिरही-निजमुला सड़क पर 13 जुलाई को आवाजाही शुरू हो गई थी, लेकिन बारिश होने से सड़क तोली तोक में फिर अवरुद्ध हो गई है। लोनिवि ने सड़कों को खोलने के लिए 27 जेसीबी, आठ डोजर लगाए हैं। ज्येष्ठ प्रमुख अयोध्या हटवाल, जिला पंचायत सदस्य देवेंद्र नेगी, ऊषा रावत और बंड विकास संगठन के पूर्व अध्यक्ष अतुल शाह का कहना है कि लोनिवि, एडीबी और पीएमजीएसवाई विभागों की ओर से सड़कों को खोलने में देरी की जा रही है, जिससे ग्रामीणों को मीलों दूरी पैदल नापनी पड़ रही है।
शासन से भी सड़कों को तत्काल खोलने के आदेश प्राप्त हुए हैं। जनपद में अधिकांश सड़कें खुलने के बाद पुन: अवरुद्ध हुई हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में पैदल रास्तों को मनरेगा के तहत निर्मित करने और निर्माण एजेंसियों को शीघ्र सड़कों को यातायात के लिए खोलने के निर्देश दिए गए हैं।
- विनोद कुमार सुमन, डीएम, चमोली
विभागीय अधिकारियों को 15 दिनों के भीतर जनपद की सभी सड़कों को खोलने के निर्देश दिए गए हैं। संबंधित विभागों के अधीक्षण अभियंताओं को जेसीबी मशीनें किराए पर लेकर शीघ्र सड़कों को खोलने के निर्देश दिए गए हैं।
- युद्धवीर सिंह बत्र्वाल, उपाध्यक्ष, निर्माण समिति, उत्तराखंड
रुद्रप्रयाग जिले में 16 सड़कें बंद
लगातार हो रही बारिश से जखनोली बैंड-कुरछोला, खांकरा-छांतीखाल, गढ़ीधार-दशज्यूला-कांडई, रैंतोली-जसोली सहित 16 सड़कें अब भी अवरुद्ध हैं। इन मार्गों के बंद होने से गांवों के लोगों को मीलों अतिरिक्त पैदल रास्तों से होकर अपने घरों तक पहुंचना पड़ रहा है।
धनपुर पट्टी सहित दशज्यूला-कांडई के गांवों में खाद्यान्न सहित अन्य जरूरी वस्तुओं की सप्लाई भी ठप है। जखोली ब्लाक की ग्राम पंचायत कुरछोला के दीपक रावत, अगस्त्यमुनि ब्लाक के चिनग्वाड़ के आरएस बिष्ट, कांडई के ललित मोहन कांडपाल का का कहना कि सड़कों के बंद होने से ग्रामीण मीलों पैदल चलने को मजबूर हैं। इधर, विभागीय अधिकारियों का कहना है कि धनाभाव और सीमित संसाधनों के कारण यातायात बहाल करने में दिक्कतें आ रही हैं। बावजूद हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं।
उत्तरकाशी जिले में गहराया राशन का संकट
बारिश और भूस्खलन से जनपद में ग्रामीणों क्षेत्रों को जोड़ने वाली आठ लिंक सड़कें मलबा आने से अवरुद्ध पड़ी हैं। सड़कें बंद होने से गांवों का तहसील मुख्यालय से संपर्क कटा हुआ है। जिले में बारिश के चलते डुंडा, भटवाड़ी, चिन्यालीसौड़, नौगांव, बड़कोट, पुरोला और मोरी तहसील के विभिन्न गांवों को जोड़ने वाली लिंक सड़कें अवरुद्ध होने से ग्रामीणों के सामने राशन का संकट गहराने के साथ-साथ उन्हें कई मूलभूत समस्याओं से जूझना पड़ रहा है।
भूस्खलन के कारण चिन्यालीसौड़ में धरासू बैंड-मरगांव-चमयाली, धरासू-जोगत मोटर एवं पुरोला में खूनीगाड-सारस, मुसाई- सुट्टा, खरादी-नगाण गांव मोटर मार्ग अवरुद्ध है। भटवाड़ी में मनेरी-जखोल, गंगोरी- डोडीताल मोटर मार्ग भी अभी तक नहीं खुल सका है। लोनिवि और पीएमजीएवाई सिंचाई खंड के अधिकारी बंद पड़े मोटर मार्ग पर जल्द यातायात सुचारु करने की बात कह रहे हैं। डीएम दीपेंद्र चौधरी ने बताया कि बारिश के कारण जनपद में आठ सड़कें बंद हैं। लोनिवि और पीएमजीएसवाई को शीघ्र बंद पड़ी सड़कों खोलने के निर्देश दिए गए हैं।
टिहरी जिले में 24 मोटर मार्ग बंद
जिले में दो राज्य मार्गों सहित अब 25 मोटर मार्ग बंद पड़े हुए हैं। इनमें ज्यादातर ग्रामीण क्षेत्रों को जोड़ने वाले ब्रांच रूट ज्यादा है। नई टिहरी-घनसाली राज्य मार्ग चौथे दिन भी नहीं खुल पाया है। यह मार्ग पांगरखाल गदेरे में बुरी तरह से ध्वस्त हो गया था। सड़क बंद होने से जिला मुख्यालय से घनसाली, प्रतापनगर, श्रीनगर और देवप्रयाग जाने वाले यात्रियों को वाया चंबा से कोटीकालोनी होते हुए खांडखाला भेजा जा रहा है।
सुवाखोली-अलमस मोटर मार्ग भी चार दिन से बंद पड़ा है, वहां भी लोग वैकल्पिक मार्ग से आवाजाही कर रहे हैं। इसी तरह प्रांतीय खंड बौराड़ी की नौ ब्रांच रूट बंद पड़े हैं। जबकि लोनिवि चंबा की तीन, नरेंद्रनगर की तीन, घनसाली की एक, कीर्तिनगर की चार, पीएमजीएसवाई प्रथम की एक, पीएमजीएसवाई नरेंद्रनगर की तीन और पीएमजीएसवाई कीर्तिनगर की एक सड़क बंद पड़ी है। लोनिवि अधिकारियों का कहना है कि सड़कों से प्राथमिकता के आधार पर मलबा हटाया जा रहा है। ब्यूरो
बारिश रुकने पर सड़क से हटेगा मलबा
बारिश में पहाड़ धंसकने और मलबा-पत्थर आने से जिलेभर में नेशनल हाईवे समेत तीस सड़कें अवरुद्ध पड़ी हैं। पाबौ में चोपड़यू में हनुमान मंदिर से आगे किलोमीटर 238 के पास एनएच पर मलबा व बोल्डर आने से मार्ग अवरुद्ध हो गया है। एनएच धुमाकोट के ईई अरुण कुमार ने बताया कि बारिश होने से सड़क खोलने में दिक्कत हो रही है। मंगलवार को काम नहीं हो पाया है। बुधवार को काम शुरू हो सकेगा।
निर्माण खंड पौड़ी का सिकू तिमली मोटर मार्ग मलबा आने से बंद हो गया। श्रीनगर के बिलकेदार गौरीकाट मार्ग पर भूस्खलन से यातायात ठप है। प्रांतीय खंड लैंसडोन की दो, निर्माण खंड दुगड्डा, बैजरों और पाबौ की तीन-तीन सड़कें बंद हैं। पीएमजीएसवाई सिंचाई खंड श्रीनगर की तीन, कोटद्वार की पांच, सतपुली की छह और बैजरों की एक सड़क मलबा आने से बंद है।