ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
राज्यसभा सांसद एवं संघ विचारक डॉ. राकेश सिन्हा ने कहा कि पाकिस्तान की बर्बादी के दिन नजदीक आ गए हैं। यदि इसने आतंकवादी गतिविधियाें पर प्रभावी अंकुश नहीं लगाया तो वह दिन दूर नहीं जब इसका वजूद ही दुनिया के नक्शे से मिट जाएगा। पाकिस्तान की भाषा बोलने वाली महबूबा मुफ्ती समेत सभी अलगाववादियों को अब यह तय करना होगा कि उन्हें भारत में रहना या फिर पाकिस्तान जाना। देश में रहकर पाकिस्तान की भाषा बोलने वाले नेताओं को यहां की जनता जरूर सबक सिखाएगी।
ओएनजीसी सभागार में रविवार को विश्व संवाद केंद्र की ओर से ‘लोकतंत्र के सम्मुख उपस्थित चुनौतियां’ विषयक संगोष्ठी आयोजित की गई। बतौर मुख्य अतिथि डॉ. राकेश सिन्हा ने कहा कि कश्मीर की घाटी इस्लामिक घाटी नहीं है। यह घाटी भारत का अभिन्न अंग है। यहां की एक-एक इंच जमीन पर हर भारतीय का हक है। कांग्रेस की नीतियों पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि लोकतंत्र के लिए व्यक्तिवाद सबसे खतरनाक शत्रु है। जहां व्यक्तिवाद हावी होता है वहां से नैतिक मूल्यों का अवमूल्यन शुरू हो जाता है। पुलवामा में हुई आतंकी घटना का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि जिन शहीदों ने राष्ट्र की रक्षा के लिए बलिदान दिया है उनका सदैव राष्ट्र ऋणी रहेगा।
संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि देश जिस दौर से गुजर रहा है वह बेहद संवेदनशील हैं। उत्तराखंड किसी भी विपरीत स्थिति का सामना करने के लिए तैयार है। कार्यक्रम में मेयर सुनील उनियाल गामा, विश्व संवाद केंद्र के निदेशक विजय कुमार, अध्यक्ष सुरेंद्र मित्तल, मीडिया प्रभारी हिमांशु अग्रवाल, सचिव राजकुमार टांक समेत कई उपस्थित रहे। इस मौके पर विश्व संवाद केंद्र की ओर से प्रकाशित वार्षिक पुस्तक का विमोचन भी किया गया।