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अनशन...तबादला...तालाबंदी...हाईकोर्ट और आंदोलन खत्म

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ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
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राजकीय शिक्षक संघ का करीब 13 दिनों तक चला आंदोलन बृहस्पतिवार को बिना किसी नतीजे के समाप्त हो गया। इन 13 दिनों में शिक्षक राजनीति के कई रंग दिखे। राज्य सरकार ने सख्त रुख दिखाते हुए पहली बार हड़ताली शिक्षकों के तबादले किए। अंत में हाईकोर्ट की नाराजगी को देखते हुए शिक्षकों ने दूसरे ही दिन आमरण अनशन खत्म कर स्कूलों में लौटने का फैसला कर लिया।
18 सूत्री मांगों के समर्थन में राजकीय शिक्षक संघ पदाधिकारियों ने 21 जुलाई से शिक्षा निदेशालय में क्रमिक अनशन शुरू किया था। शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय और विभागीय अधिकारियों ने उन्हें समझाया कि ज्यादातर मांगों पर कार्रवाई चल रही है। इसके बावजूद शिक्षक क्रमिक अनशन पर अड़े रहे। 27 जुलाई को शिक्षा निदेशक आरके कुंवर ने शिक्षकों को पत्र लिखकर अनशन खत्म करने को कहा। शिक्षकों ने जवाब में आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी। 28 जुलाई को शिक्षा मंत्री के आदेश पर शिक्षक संघ के अध्यक्ष कमल किशोर डिमरी, महामंत्री डॉ. सोहन माझिला और पूर्व अध्यक्ष राम सिंह चौहान का तबादला कर दिया गया।
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अगले दिन शिक्षक नेताओं ने निदेशालय और सभी मुख्य शिक्षाधिकारी कार्यालयों में तालाबंदी की चेतावनी दी। इस पर 30 जुलाई को शिक्षा निदेशक आरके कुंवर ने सभी मुख्य शिक्षा अधिकारियों को तालाबंदी करने वाले शिक्षकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए। इसके बावजूद 31 जुलाई को शिक्षक नेताओं ने निदेशालय और कई जिलों में तालाबंदी की। दो-तीन जिलों में शिक्षकों के खिलाफ तहरीर भी दी गई। इसके बाद शिक्षक नेताओं ने निदेशालय में आमरण अनशन शुरू कर दिया। इसी दिन हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल हुई। बृहस्पतिवार को हाईकोर्ट के सख्त रुख के बाद शिक्षकों ने आमरण अनशन समाप्त करने की घोषणा की।
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कब-क्या हुआ
21 जुलाई : शिक्षक नेताओं ने शिक्षा निदेशालय में क्रमिक अनशन शुरू किया।
27 जुलाई : शिक्षा निदेशक आरके कुंवर ने शिक्षकों को पत्र लिख अनशन खत्म करने को कहा। शिक्षकों ने आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी।
28 जुलाई : शिक्षा मंत्री के आदेश पर राजकीय शिक्षक संघ के अध्यक्ष कमल किशोर डिमरी, महामंत्री डॉ. सोहन माझिला और पूर्व अध्यक्ष राम सिंह चौहान का तबादला कर दिया गया।
29 जुलाई : शिक्षक नेताओं ने निदेशालय और सभी मुख्य शिक्षाधिकारी कार्यालयों में तालाबंदी की चेतावनी दी। साथ ही निदेशालय में आमरण अनशन करने की चेतावनी दी।
30 जुलाई : शिक्षा निदेशक आरके कुंवर ने सभी मुख्य शिक्षा अधिकारियों को तालाबंदी करने वाले शिक्षकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए।
31 जुलाई : शिक्षक नेताओं ने निदेशालय और कई जिलों में तालाबंदी की। दो-तीन जिलों में शिक्षकों के खिलाफ तहरीर भी दी गई। शिक्षक नेताओं ने निदेशालय में आमरण अनशन शुरू कर दिया। इसी दिन हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल हुई।
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02 अगस्त : हाईकोर्ट के सख्त रुख के बाद शिक्षकों ने आमरण अनशन समाप्त करने की घोषणा की।
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संघ में दिखा एका का अभाव
राजकीय शिक्षक संघ के आंदोलन के दौरान एका का अभाव भी दिखा। प्रांतीय कार्यकारिणी को छोड़कर अन्य सभी स्तरों पर कुछ न कुछ विरोध के स्वर लगातार उभरते रहे। यहां तक ऊधमसिंह नगर और हरिद्वार इकाई ने खुद को आंदोलन से पूरी तरह अलग कर दिया। वहीं, प्रदेश के अन्य कई शिक्षकों ने भी आंदोलन की मुखालफत की।
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