ब्यूरो/ अमर उजाला, देहरादून
शहर की मस्जिदों में रमजानुल मुबारक के तीसरे जुमे की नमाज अकीदत के साथ अदा की गई। नमाज से पहले उलमाओं ने सदका-ए- फितर की रकम का ऐलान किया। शहर काजी मोहम्मद अहमद कासमी ने बताया कि 1 किलो 633 ग्राम गेंहू वजन प्रति व्यक्ति की दर से फितरे की रकम दी जाती है। औसत दर्जे की गेहूं के मुताबिक 35 रुपये निर्धारित किया गया है।
शहर काजी मोहम्मद अहमद कासमी और शहर मुफ्ती सलीम अहमद कासमी ने जुमे की नमाज से पहले तकरीर में कहा कि सदका-ए-फितर हर मुसलमान मर्द, औरत और बच्चों पर वाजिब है। जो साहिब-ए-निसाब हो। रमजान के महीने में सदका-ए-फितर मोहताजियों को खाने-पीने का इंतजाम करने के मकसद से वाजिब है। जिसके जिम्मे जिसका खाने-पीने का खर्च वाजिब है, उनकी तरफ से उनका फितरा अदा करना भी वाजिब है। अनाज और इस्तेमाल होने वाली चीजों की शक्ल में फितरा अदा करना अफजल (बेहतर) माना गया है। हदीस के मुताबिक ईद की नमाज से पहले सदका-ए- फितर अदा करना वाजिब है। ईद के बाद अदा करना मकरूह है। लेकिन फिर भी अदा करने पड़ेगा।
उधर, नमाजियों की संख्या ज्यादा होने के कारण छतों और मजिस्दों के बाहर सफें बिछाकर नमाज अदा करनी पड़ी। नमाज के बाद पेश इमामों ने खुशहाली, भाईचारे की दुआ कराई। शहर की जामा मस्जिद पलटन बाजार में शहर काजी मोहम्मद अहमद कासमी, मुस्लिम कालोनी पार्क वाली मस्जिद में मुफ्ती सलीम अहमद, धामावाला में मुफ्ती हुजैफा, ईसी रोड पर कारी एहसान, सना मस्जिद आजाद कालोनी में मुफ्ती वासिल, लाइब्रेरी वाली मस्जिद मेहूंवाला में मौलाना रिसालुद्दीन हक्कानी, कांवली में मौलाना हुसैन, माजरा में मौलाना शौकीन ने नमाज अदा कराई।
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इमाम हसन के नक्शे कदम चलें मुसलमान
तीसरे जुमे पर गांधी ग्राम की गौसिया जामा मस्जिद में खुतबे से पहले नायब सुन्नी शहर काजी सैयद अशरफ कादरी ने नमाजियों को खिताब कर जकात और सदका-ए-फितरा के बारे में जानकारी दी। साथ ही उन्होंने लोगों को हजरत मौला अली और हजरत फातिमा के बड़े साहबजादे इमाम हसन की यौमे पैदाइश की मुबारकबाद दी। उन्होंने बताया कि अपनी खिलाफत छोड़कर मुसलमानों के दो धड़ों में सुलह कराकर मिसाल पेश की। हमें उनके नक्शेकदम पर चलकर समाज में इत्तिफाक और इत्तेहाद के लिए काम करना चाहिए। वहीं गौसिया जामा मस्जिद में मौलाना नूरूल हुदा, रजा जामा मस्जिद लोहियानगर में मौलाना फिरोज, कंडोली की साबरी मस्जिद में मौलाना मसील बरकाती ने नमाज अदा कराई और माह-ए-रमजान की फजीलत बयां की।
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शरीर की जकात है रोजा
ईसी रोड स्थित शिया जामा मस्जिद में माह-ए-रमजान के दूसरे जुमे की नमाज इमाम-ए-जुमा सैय्यद शहंशाह हुसैन जैदी ने अदा कराई। उन्होंने कहा कि रोजा समाज में बराबरी का संदेश देता है। रोजा शरीर की जकात है। जैसे हम अपने माल की जकात अदा करते हैं, ऐसे ही हमें रमजान रोजे रख शरीर की जकात अदा करने का मौका देता है। उन्होंने इस माह में गरीबों की ज्यादा से ज्यादा खिदमत करने की अपील की।