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करंट से झुलसी नाबालिग की इलाज के दौरान मौत, छोटी बहन का इलाज जारी

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करंट से झुलसी बच्ची ने दम तोड़ा
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ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून।
विद्युत निगम के कर्मचारियों की लापरवाही से करंट की चपेट में आकर झुलसे तीन नौनिहालों में से एक बच्ची की शनिवार को मौत हो गई। जबकि अन्य दो की हालत अभी भी चिंताजनक बनी हुई है। वहीं पीड़ित परिजनों को दो-दो लाख की आर्थिक सहायता देने की मुख्यमंत्री की घोषणा के 20 दिन बाद भी उनको कुछ नहीं मिला है। यूपीसीएल ने भी पीड़ितों को कोई आर्थिक सहायता नहीं दी है।
पिछले माह टिहरी जिले के सकलाना पट्टी तहसील क्षेत्र के ग्राम बरोड़ा निवासी चंदन सिंह की दो बेटियां रीतिका (11), लक्ष्मी (9) और परिवार के ही गोविंद का चार वर्षीय बेटा शशांक करंट से गंभीर रूप से झुलस गए थे। हादसे के समय तीनों बच्चे स्कूल से घर लौट रहे थे। विद्युत पोल में उतरे करंट की चपेट में आकर झुलसे तीनों बच्चों को पहले टिहरी जिला अस्पताल ले जाया गया था। वहां उनकी गंभीर हालत को देखते हुए डॉक्टरों ने देहरादून के श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल रेफर कर दिया था। यहां रीतिका की गंभीर हालत को देखते हुए उसे आईसीयू में रखा गया था। 20 दिन तक डॉक्टरों की टीम ने रीतिका की जिंदगी बचाने के तमाम प्रयास किए लेकिन उसे बचाया नहीं जा सका। अस्पताल प्रबंधन के मुताबिक रीतिका की शनिवार शाम मौत हो गई। जबकि छोटी बहन लक्ष्मी और शशांक का इलाज किया जा रहा है।
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इस घटना के सुर्खियों में आने के बाद मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने पीड़ित परिजनों को दो-दो लाख की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की थी, लेकिन आज तक कुछ नहीं मिला। वहीं यूपीसीएल की ओर से भी परिजनोें को कोई आर्थिक सहायता नहीं दी गई है।
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