ब्यूरो/ अमर उजाला, देहरादून।
महानगर सिटी बस सेवा महासंघ, देहरादून ने पुलिस पर बस संचालकों का मानसिक एवं आर्थिक उत्पीड़न का आरोप लगाया है। इस मामले में पीएमओ ने उत्तराखंड के मुख्य सचिव को जांच के आदेश दिए हैं। वहीं सिटी बस ऑपरेटरों ने कहा कि उत्पीड़न बंद न होने पर हड़ताल की चेतावनी दी है।
महानगर सिटी बस सेवा महासंघ अध्यक्ष विजय वर्धन डंडरियाल ने सोमवार को पत्रकारों से बातचीत में कहा कि ओवरलोडिंग में चालान करने का अधिकार सिर्फ आरटीओ को है। इसके तहत प्रति सवारी आठ सौ रुपये जुर्माने का प्रावधान है। इसके बावजूद देहरादून पुलिस नियम विरुद्ध यात्री बसों का ओवरलोडिंग में चालान काट रही है और मनमाने ढंग से जुर्माना ठोंका जा रहा है। मनमाने चालान के चलते कई सीज बसें खड़े खड़े जंक खा रही हैं।
डंडरियाल ने कहा कि पुलिस उत्पीड़न की शिकायत छह फरवरी 2017 को प्रमुख सचिव गृह से की गई थी। गृह विभाग से कोई जवाब नहीं मिलने पर पीएमओ में शिकायत की गई थी। इस पर पीएमओ कार्यालय ने मुख्य सचिव को मामले की जांच कर रिपोर्ट मांगी है। डंडरियाल ने कहा कि इसके बाद भी उत्पीड़न बंद नहीं हुआ तो हड़ताल करने पर मजबूर होंगे और सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे।
सीज बस में उगे पेड़
महासंघ अध्यक्ष डंडरियाल ने कहा कि पुलिस ने प्रेमनगर से परेड ग्राउंड तक चलने वाली बस संख्या (यूए 30 ए 6145) का लगातार तीन बार चालान किया। पहली बार में चालक का लाइसेंस, दूसरी बार में बस की आरसी जब्त की। तीसरी बार चालान में डीएल और आरसी नहीं होने का जिक्र करते हुए परमिट जब्त कर दिया। चौथी बार भी सीपीयू ने बस के कागज नहीं होने पर उसे सीज कर दिया। अब इस सीज बस पर 70 हजार से अधिक जुर्माना है। बस पुलिस लाइन में खड़ी है और उसमें पेड़ उग आए हैं।