रुड़की।
सिविल अस्पताल में नवजात शिशुओं के लिए बनाया गया एसएनसीयू (सिक न्यू बार्न केयर यूनिट) लगभग एक साल से बंद पड़ा है, जबकि कागजों में इसका संचालन पहले ही दिखाया जा चुका है। इससे एक ओर जहां नवजात शिशुओं को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है, वहीं सरकार को भी राजस्व की चपत लगाई जा रही है। यही नहीं एसएनसीयू के निर्माण में भी लाखों के गड़बड़झाले की आशंका जताई जा रही है। सूत्रों की मानें तो एसएनसीयू के लिए नए भवन का निर्माण किया जाना था, लेकिन स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से पुराने भवन में ही लीपापोती कर मशीनें लगा दी गई हैं।
सिविल अस्पताल रुड़की में 2012-13 से नवजात शिशुओं के लिए एसएनसीयू का संचालन किया जा रहा था, लेकिन इसमें भी चिकित्सकों का टोटा बना हुआ था। अस्पताल के एक मात्र बालरोग विशेषज्ञ पर ही एसएनसीयू के संचालन की भी जिम्मेदारी थी, लेकिन वर्ष-2016 में केंद्र सरकार की ओर से तीन बेड के एसएनसीयू को अपग्रेड कर 10 बेड का एसएनसीयू बनाने की स्वीकृति मिली। इसके लिए बजट भी जारी कर दिया गया। इसके तहत नवजात शिशुओं की आकस्मिक चिकित्सा उपलब्ध कराई जानी थी। इसके लिए नए भवन का निर्माण कर नई मशीनें लगाई जानी थी, लेकिन अधिकारियों की मिलीभगत से पुराने भवन में ही लीपापोती कर एसएनसीयू केंद्र बना दिया गया। यही नहीं कुछ नई मशीनें लगाकर इसका संचालन भी कागजों में दर्शा दिया गया, जबकि हकीकत में एसएनसीयू सेंटर बंद पड़ा है। ऐसे में आवश्यकता पड़ने पर नवजात शिशुओं के परिजनों और तीमारदारों को निजी अस्पतालों में जेब ढीली करने के लिए मजबूर होना पड़ता है। सूत्रों के अनुसार एसएनसीयू केंद्र के निर्माण में अधिकारियों की मिलीभगत से लाखों का गड़बड़झाला किया गया है, लेकिन अब तक इसकी सुध न तो स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने ली है और न ही स्थानीय प्रशासन को इसकी परवाह है। इस संबंध में सिविल अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डा. संजय कंसल का कहना है कि चिकित्सकों की कमी से फिलहाल एसएनसीयूू बंद पड़ा है। शीघ्र ही इसे संचालित कराने के प्रयास किए जा रहे हैं।