दिवंगत अधिवक्ता राजेश सूरी के भाई राज सूरी के मेडिकल स्टोर में 10 साल पहले हुई चोरी की घटना में पुलिस फिर से चोरों को तलाशने के लिए दौड़ लगाएगी। अप्रैल 2016 में हुई इस घटना में पुलिस ने तीन साल पहले यह कहते हुए अंतिम रिपोर्ट लगा दी थी कि चोर पकड़े नहीं जा सके हैं और माल भी बरामद नहीं हुआ है। ऐसे में इस मुकदमे को लंबित रखना ठीक नहीं होगा। अब पीड़ित की आपत्ति के बाद कोर्ट ने इस एफआर को अस्वीकार करते हुए दोबारा विवेचना के आदेश दिए हैं।
राज सूरी का कांवली रोड पर मेडिकल स्टोर है। इसी से सटा राजेश सूरी का दफ्तर भी है। उनके इस परिसर में 16 जनवरी 2016 को चोरी कर ली गई थी। यहां से 15-20 हजार रुपये नकद और अधिवक्ता राजेश सूरी की कुछ फाइलें चोरी हो गई थीं। पुलिस ने घटनास्थल का मुआयना भी किया था और एफएसएल ने भी मौके से जांच के लिए नमूने लिए थे। कोतवाली नगर में मुकदमा दर्ज किया और कई संदिग्धों से पूछताछ की गई। बावजूद इसके पुलिस इस मामले में चोरों को पकड़ने में कामयाब नहीं हो पाई। इसके बाद पुलिस ने वर्ष 2023 में इस मामले में एफआर लगा दी। एफआर में तर्क दिया गया कि मुल्जिमों को पकड़ा नहीं जा सका और न ही माल बरामद हुआ। मुकदमे की विवेचना ज्यादा लंबे समय तक लंबित नहीं छोड़ी जा सकती है।
इस एफआर को राज सूरी ने चुनौती दी। राज ने न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम भावना पांडेय की कोर्ट को बताया कि उनकी इस दुकान में कई बार चोरी हो चुकी है। इस बात को पुलिस को भी बताया गया था। राजेश सूरी भ्रष्टाचार के मामले उजागर करते थे। ऐसे में उनकी फाइलों को चुराने के लिए भी कोई यह काम कर सकता है। ताकि, कुछ लोगों को बचाया जा सके। राज ने यह भी बताया कि उनकी दुकान और ऑफिस के अलावा आसपास की किसी भी दुकान में चोरी का कोई प्रयास नहीं हुआ। ऐसे में यह साजिशन भी हो सकता है। न्यायालय ने इस आपत्ति को सुनकर माना कि पुलिस ने एफएसएल के बिंदु पर जांच नहीं की और नही साजिश की आशंका की। ऐसे में कोर्ट ने यह एफआर अस्वीकार करते हुए पुलिस को दोबारा विवेचना के आदेश दिए हैं।