मासूम का अपहरण करने में महिला समेत तीन आरोपियों को अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई है। अदालत ने तीनों पर 25-25 हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया।
घटना शहर के हरिहरगंज इलाके में स्थित कृष्णा कालोनी की थी। असोथर के केसापुर गांव की रहने वाली अंजना द्विवेदी कृष्णा कालोनी में पूर्व सैनिक कैलाश नाथ त्रिपाठी के घर किरायेदार थी। अंजना का बुलंदशहर में रहने वाले दो लोगों से मोबाइल पर संपर्क हुआ और तीनों ने मिलकर कैलाशनाथ के दो साल के पौत्र ओम के अपहरण की साजिश रची। 11 नवंबर 2011 को दोपहर करीब साढ़े 11 बजे अंजना घर में ओम की मां पूनम के पास पहुंची और दादी के बुलाने की बात कहकर ओम को अपने साथ ले आई।
इसके बाद उसने दो अन्य साथियों बुलंदशहर के सरायं कोतवाली के हितमात निवासी करण वीर सिंह पुत्र योगेंद्र सिंह व पुष्पराज उर्फ राजकुमार पुत्र जयकरन सिंह को दे दिया। दोनों अपहर्ता बच्चे को साथ लेकर बुलंदशहर चले गए। इन लोगों ने परिजनों से 15 लाख रुपये की फिरौती मांगी। पुलिस टीम सर्विलांस के जरिये बुलंदशहर पहुंची। वहां मुठभेड़ के दौरान आरोपियों को गिरफ्तार कर बच्चे को सकुशल छुड़ा लिया।
कैलाश नाथ त्रिपाठी ने किरायेदार अंजना द्विवेदी, करण वीर सिंह और पुष्पराज के खिलाफ अपहरण का मुकदमा दर्ज कराया था। एडीजे कोर्ट नंबर दो नित्यानंद श्रीनेत ने मामले की सुनवाई की। अदालत में सोमवार को अभियोजन पक्ष से सहायक शासकीय अधिवक्ता जय पाल वर्मा और आसिफ मकसूद ने आरोपियों के खिलाफ सबूत और दलीलें पेश की। अदालत ने तीनों मुल्जिमों को दोषी मानते हुए आजीवन कारावास और 25-25 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माना अदा न करने पर छह माह के अतिरिक्त कारावास की सजा सुनाई है।
मां के साथ जेल में रहेगा बच्चा
फतेहपुर। अपहरण कांड की मुख्य आरोपी अंजना का एक ढाई साल का बच्चा भी है। मां को सजा होने के बाद पुलिस ने उसे जेल भेज दिया है। मां के साथ उसका ढाई वर्ष का बेटा भी जेल में ही रहेगा।
13 नवंबर को ही चढ़े थे हत्थे
फतेहपुर। ओम अपहरणकांड की घटना, खुलासा और सजा होने की तिथि एक संयोग ही मानी जा रही है। 11 नवंबर 2011 को दोपहर में 11.30 बजे अपहरण हुआ था। घटना के दो दिन बाद 13 नवंबर को पुलिस ने मुठभेड़ में अपहरणकर्ताओं को गिरफ्तार किया था। अब 13 नवंबर को ही आरोपियों को कोर्ट ने सजा सुनाई है। कोर्ट परिसर में यह संयोग चर्चा में रहा।
दिल को मिला सुकून
मुल्जिमों को सजा मिलने के बाद वादी कैलाश नाथ त्रिपाठी प्रसन्न दिखे। उन्होंने कहा कि उनके पौत्र का अपहरण करने वालों को सजा मिलना बहुत जरूरी था, ताकि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों। उन्होंने लोगों को सलाह दी कि किरायेदार रखने से पहले अच्छी तरह से जानकारी कर लें।