बेटा खुद मां को छत पर ले जाता दिखा। बस एक गुमनाम खत, सीसीटीवी और रेलिंग के सवाल ने बेटे की करतूत उजागर कर दी। बीत 27 सितंबर को गांधीग्राम के दर्शन एवेन्यू में रहने वाली जयश्रीबेन विनोदभाई नाथवानी की उनकी बिल्डिंग की छत से गिरने के बाद मौके पर ही मौत हो गई थी। आत्महत्या का मामला दर्ज कर फाइल बंद कर दी थी, लेकिन बाद में पुलिस को एक अज्ञात चिट्ठी मिली थी जिसमें शक जाहिर किया गया था कि जयश्रीबेन की हत्या हुई है।
इसके बाद पुलिस ने बिल्डिंग के सीसीटीवी फुटेज चेक किए तो एक दूसरी कहानी सामने आई। फुटेज में दिखा कि मृत जयश्रीबेन बीमारी की वजह से चलने में असमर्थ हैं और उनका बेटा संदीप सीढ़ियां चढ़ने में उनकी मदद कर रहा है और सहारा दे रहा है। बस यहीं से पुलिस को कड़ी मिल गई।
'सीसीटीवी फुटेज से पुलिस को पता चला कि जब जयश्रीबेन छत से कूदीं तो उनका बेटा संदीप उनके साथ था और बेटे के साथ होने पर भी आत्महत्या कर पाना संभव नहीं था। क्योंकि जयश्रीबेन की मेडिकल रिपोर्ट्स और हेल्थ रेकॉर्ड्स में यह साफ था कि वे अपने पैरों पर चलने की हालत में नहीं थीं। वीडियो में संदीप अपनी मां को छत पर ले जाता देखा गया है। लेकिन इस पर संदीप ने कहानी बनाई थी कि 'मेरी मां सूरज की पूजा करने जा रही थीं और मैं उनकी मदद कर रहा था।'
पुलिस को संदीप की कहानी पर शक हो रहा था कि क्योंकि बिल्डिंग की करीब ढाई फीट ऊंची रेलिंग पारकर उनका आत्महत्या करना संभव नहीं था। अधिकारियों ने बताया कि जब आरोपी से सख्ती से पूछताछ की गई तो वह टूट गया और बताया कि वह अपनी मां की खराब सेहत से थक गया था और इसलिए उसने अपनी मां को मारने का फैसला किया।
उधर, ये बात भी सामने आई कि सास-बहू में खटपट थी, पत्नी ने भी इस आपराधिक कुकृत्य के लिए पति को नहीं रोका। सवाल ये उठता है कि मां अगर जन्म देने के बाद ऐसा सोचती कि बेटे को रोज कौन नहलायेगा, उसका मलमूत्र कौन साफ करेगा तो फिर वो भी अपनी संतान को कहीं फेंक देती तो कैसा होता..?