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फिजियोथैरेपी के बहाने दिव्यांग बच्ची से अश्लील हरकत, गिरफ्तार

Fri, 18 Mar 2016 02:09 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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बच्‍ची से छेड़छाड़ - फोटो : DEMO Pics
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बुजुर्गों की मदद के लिए कार्यरत संस्था हेल्प एज इंडिया में एक नाबालिग बच्ची से अश्लील हरकतें करने का मामला सामने आया है। आरोप संस्था में बतौर फिजियोथैरेपिस्ट कार्यरत सतनाम सिंह (32) पर है, जिसे पुलिस ने डड्डूमाजरा से गिरफ्तार कर लिया है।
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पुलिस ने आरोपी को जिला अदालत में पेश कर जेल भेज दिया है। वहीं संस्था ने भी उसे टर्मिनेट कर दिया है। इस तरह का यह कोई पहला मामला नहीं, इससे पहले बच्चों से कुकर्म के मामले में थिएटर एज संस्था के संचालक जुल्फिकार जेल में हैं।

10 साल की एक नाबालिग बच्ची के परिजनों ने मलोया पुलिस को बताया कि उनकी बच्ची के हाथों में काफी दिक्कत है। वह पिछले कुछ दिनों से सेक्टर-38 वेस्ट की संस्था हेल्प एज इंडिया से उसका इलाज करवा रहे हैं। वहां और भी बच्चों का इलाज किया जाता है, लेकिन मंगलवार को संस्था में कार्यरत सतनाम सिंह उनकी बच्ची को फिजियोथैरेपी के लिए कमरे में ले गया, जहां उसने बच्ची के साथ अश्लील हरकतें शुरू कर दी।
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किसी तरह से बच्ची वहां से निकल भागी और अपने माता-पिता को सारी बात बताई। इसके बाद परिजन मलोया थाना प्रभारी राम रत्न शर्मा से मिले और पुलिस को आरोपी के खिलाफ लिखित में शिकायत दी। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने बच्ची का मेडिकल करवाया और आरोपी को काबू कर लिया। आरोपी फिजियोथैरेपिस्ट की पहचान मोहाली के गांव तियूड़ निवासी सतनाम सिंह (32) के रूप में हुई है।
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मोबाइल लोकेशन के आधार पर आरोपी फिजियोथेरेप‌िस्ट पकड़ा

गिरफ्तार - फोटो : demo pics
पुलिस जब आरोपी सतनाम के घर पर छापामारी की तो वह वहां से फरार था। इतना ही नहीं आरोपी संस्था में भी नहीं आया। मलोया पुलिस ने आरोपी की कॉल डिटेल खंगाली और फिर उसके एक दोस्त से पूछताछ की।

इसके बाद कॉल ट्रेस कर उसे पुलिस ने उसे डड्डूमाजरा से गिरफ्तार किया। बुधवार को आरोपी को जिला अदालत में पेश कर 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।

एक महीने पहले ही आरोपी को रखा था सेंटर में
हेल्प एज इंडिया के स्टेट हेड भुवनेश्वर शर्मा ने बताया कि जैसे ही बच्ची से छेड़छाड़ का मामला सामने आया, उसी समय सतनाम को टर्मिनेट कर दिया गया। सतनाम को सेंटर में पिछले महीने एक फरवरी को फिजियोथेरेपी के लिए रखा गया था। उसका एक साल का कांट्रैक्ट था। उनका कहना था कि वैसे तो एनजीओ ट्राइसिटी के बुजुर्गों के लिए काम करती है, लेकिन अगर कोई इस तरह का केस आता था तो उसको मना नहीं किया जाता था।
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