बलरामपुर सदर सीट से सपा विधायक के भाइयों को सत्ता के नशे ने ऐसा बहकाया कि जघन्य काण्ड को अंजाम दे दिया। रंगीन मिजाजी व असलहों के मद में चूर इन लोगों ने एक युवक की जान ले ली। हमेशा विधायक के भाइयों का सुरक्षा कवच बनने वाली पुलिस इस बार इनके खिलाफ कितनी प्रभावी कार्रवाई कर पाती है यह देखने वाली बात होगी।
धानेपुर थाना क्षेत्र के राजापुर गांव निवासी जगराम पासवान विधायक बनने के पहले पार्टी के सामान्य कार्यकर्ता रहे और अपने पिता के ईंट-भट्ठे पर उनका हाथ बंटाते थे। 2012 में बलरामपुर सीट सुरक्षित होने के बाद सपा के टिकट पर जगराम पासवान विधायक बन गए।
इसके बाद से ही इनके परिवारीजनों ने अपने गुर्गों के साथ मिलकर इलाके में आतंक मचाना शुरू कर दिया। जगराम ने अपने परिवारीजनों के नाम पर असलहे भी हासिल कर लिए। विधायक के भाई अन्नू पासवान के नाम पर भी रिवॉल्वर का लाइसेंस है।
भट्ठे के मजदूरों के अपहरण से लेकर मारपीट व जमीनों पर अवैध कब्जे के मामले में विधायक के परिवारीजन कई बार अखबारों की सुर्खियां बने और शिकायत भी थाने पर पहुंची, लेकिन सत्ता की हनक से इनके खिलाफ कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हो पाई।
करीब एक साल पहले अवैध कार्यों का विरोध करने पर विधायक के भाइयों ने धानेपुर थानाध्यक्ष देवेंद्र पांडेय के साथ अभद्रता करते हुए उनकी वर्दी फाड़ने की कोशिश की, लेकिन आला अधिकारियों ने मामला दबा दिया।
जमीन पर जबरन कब्जा कर रहे विधायक के परिवारीजनों को रोकने पर उतरौला के कोतवाल रहे भरतलाल यादव को अपनी कुर्सी गंवानी पड़ी।
इन घटनाओं पर कार्रवाई के बजाय पर्दा डालने वाले अधिकारियों के रवैये से विधायक के भाइयों के हौसले बढ़ते गए। अपनी इसी दबंगई व सत्ता के रौब के चलते विधायक के भाइयों ने शनिवार की रात हत्या जैसा काण्ड अंजाम दे डाला।