सहारनपुर में आगजनी में जला घर का सामान
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
सहारनपुर में गांव शब्बीरपुर में हुए जातीय संघर्ष के दूसरे दिन भी घरों और बिटौड़ों से उठता धुआं उपद्रवियों की बर्बरता की कहानी बयां कर रहा है। घटना के दूसरे दिन भी कई जगहों पर आग सुलगती रही। जले हुए घर, टूटा बिखरा सामान और जलीं दीवारें नफरत की आग से मिले दर्द का एहसास करा रही है। खूंटे से बंधे मवेशी भी झुलस गए।
शुक्रवार को हुए इस बवाल के चलते शनिवार को गांव में सन्नाटा पसर गया। गांव में सिर्फ पुलिस बल के अलावा कोई बच्चा तक नजर नहीं आया। लेकिन गांव के जले हुए घर और उनमें से दूसरे दिन भी उठता धुआं बवाल की कहानी बयां करते रहे। गांव में पुरुष तो घटना के बाद से ही नदारद हो चुके थे। कुछ घायल होकर अस्पताल में थे तो कुछ को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया और कुछ पुलिस की कार्रवाई की डर से गांव से बाहर जाकर छिप गए। गांव में कुछ महिलाएं ही शेष थीं जो खुद ही बाल्टियों में पानी लाकर आग को बुझाने का प्रयास कर रहीं थीं।
गांव में होनी थी युवक की घुड़चढ़ी, रोका कार्यक्रम
संघर्ष के बाद गलियों में पसरा सन्नाटा
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कई घरों में तो उपद्रवियों ने चूल्हे तक तोड़ डाले। घरों में रखे बर्तन, कपड़े सहित अन्य सामान जल गया। नफरत की आग में 50 से अधिक घर प्रभावित हुए हैं। सुरक्षा की दृष्टि से अधिकांश लोगों ने अपने घरों के बच्चे तक गांव से बाहर रिश्तेदारियों में भेज दिए हैं। आग से बेचैन कई मवेशी खेतों में चले गए। लेकिन खूंटे से बंधे मवेशी झुलस गए। एक घेर में गाय की बछिया खूंटे से बंधी झुलसती रही। उसे अपने मालिक का इंतजार है। उन्हें चारा डालने वाला भी कोई नजर नहीं आ रहा। डर से लोग अभी गांव में नहीं जा रहे हैं। वहीं, गांव शब्बीरपुर में राजपूत समाज के एक युवक की शादी होनी है। यहां मंढ़ा कार्यक्रम चल रहा था। लेकिन इस उपद्रव के चलते युवक की घुड़चढ़ी का कार्यक्रम रोक दिया गया है। परिवार के लोग बैंडबाजे की बजाय परिजनों को ही बारात के रूप में लेकर गए।
रात में ही छोड़ गए गांव
जातीय संघर्ष के बाद घरों में पड़े ताले
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सहारनपुर में शब्बीरपुर में महाराणा प्रताप जयंती पर निकाली जा रही शोभायात्रा को लेकर हुए बवाल के बाद दलित समुदाय के लोग काफी भयभीत है। कई गांवों के भयभीत दलित रातों रात पलायन कर गए हैं। गांव में राजपूत और दलित संघर्ष के बाद से दहशत का माहौल बना है। शब्बीरपुर में उपद्रव के बाद भारी सन्नाटा पसरा हुआ है। भयभीत ग्रामीण रातों रात पलायन कर गए। इनमें ज्यादातर ग्रामीण दलित समाज के बताये जा रहे है।
कपिल कुमार, नीटू, अग्नि भास्कर, सेठपाल, महिपाल, परमाल, नरेश, सौदास, मनोज, अमनेश, मनोज, इंद्र, जसवीर, रकम सिंह, दल सिंह, श्याम सिंह, सुनील, सतेंद्र, राजकुमार, शिवराज, सौराज, बिरमपाल सिंह, सुबोध, अनुज, राजपाल, इंद्र, ओमपाल, नरेश कुमार, मनवीर, प्रेम, ब्रिजेश, मुंशीराम, छत्रपाल सिंह, सतपाल, दलीप, जसवीर, मिलकराम, दारा सिंह, दिनेश, रोशनी, अमरजीत, गोपीचंद, साबकोर, सचिन कुमार, भोपाल, मुकेश और मुनेश शामिल हैं। सभी लोग शब्बीरपुर के निवासी हैं। इनके घर जले हैं और घरों में रखा सामान एवं वाहन तोड़े गए और जलाए गए। अनुज शब्बीरपुर, काला निवासी महेशपुर, अनिल निवासी बालू माजरा, इलम सिंह निवासी महेशपुर, दुष्यंत निवासी शब्बीरपुर, अर्जुन निवासी शिमलाना, पुष्पेंद्र निवासी महेशपुर, मुकेश निवासी महेशपुर, कुलदीप निवासी महेशपुर, काला निवासी महेशपुर, सुखवीर सिंह, अशोक, पप्पन निवासी शिमलाना, अमन, नरेश, किशन, सोम्मी, परमाल, मोहन, ओमप्रकाश, सुभाष चंद निवासी महेशपुर ऐसे पीड़ित है जिनकी दुुकानों में तोड़फोड़ की गई और आग लगाई गई और जिन लोगों के बिटौड़े जले।