पिछले 156 दिनों से गुरुवार शाम अपनी मांगों को लेकर एएलसी कार्यालय के बाहर धरने पर बैठे मिंडा कंपनी के दो कर्मचारी अचानक एसएसपी कार्यालय में लगे वायरलेस टावर पर चढ़ गए। वे अपने ऊपर केरोसिन डालकर आत्मदाह करने की धमकी देने लगे। आनन-फानन में एसडीएम सहित पुलिस के आला अधिकारी मौके पर पहुंचे और युवकों को मनाने का प्रयास किया लेकिन युवक बिना उनकी मांगों को माने टावर से नीचे उतरने के लिए तैयार नहीं हुए।
छह माह पहले मिंडा कंपनी ने अपने 26 स्थायी कर्मचारियों को बिना कारण बताए नौकरी से निकाल दिया था। कर्मचरियों ने इसकी शिकायत एएलसी कार्यालय में की, लेकिन कोई निराकरण नहीं हुआ। इसके बाद सभी कर्मचारी एएलसी कार्यालय के बाहर धरने पर बैठ गए। कंपनी जिला प्रशासन की मध्यस्थता में कर्मचारियों और कंपनी प्रबंधन के बीच कई दौर की वार्ताएं हुई लेकिन सभी असफल रहीं।
20 दिन पहले धरने पर बैठे 26 कर्मचारियों में से 11 ने भूख हड़ताल शुरू कर दीं। इसमें से एक की हालत गंभीर होने पर तीन दिन पहले ही उसे एसडीएम पंकज उपाध्याय के निर्देशों पर सुशीला तिवारी अस्पताल में भर्ती कराया गया। गुरुवार को दिन भर अनशन और धरना सामान्य रहा लेकिन शाम करीब साढ़े पांच बजे अनशनकारी राजेंद्र संभल और जगदीश एसएसपी कार्यालय में लगे करीब 60 फीट ऊंचे वायरलेस टावर पर केरोसिन की बोतल लेकर चढ़ गए और आत्मदाह की धमकी देने लगे।
करीब 5.45 बजे पुलिस के एक जवान ने आला अधिकारियों को सूचना दी। इसके बाद एएसपी पंकज भट्ट, सीओ मंजूनाथ टीसी सहित ही एसडीएम पंकज उपाध्याय मौके पर पहुंचे। एसडीएम ने एएलसी कार्यालय में बैठकर टावर पर चढ़े कर्मचारियों के माध्यम से भी उन्हें समझाने की कोशिश की लेकिन कर्मचारी अपनी जिद पर अड़े रहे। कर्मचारियों की एक ही मांग थी कि मिंडा प्रबंधन आए और उनके मामले का निस्तारण करे।
एसडीएम पंकज उपाध्याय और एएलसी उमेद सिंह चौहान फोन पर मिंडा प्रबंधन से वार्ता करते रहे लेकिन कोई भी मौके पर आने को तैयार नहीं हुआ। 8 बजे पुलिस कर्मियों ने टावर के नीचे सर्कस का जाल बांधना शुरु कर दिया। मामले को लेकर एसडीएम ने कहा है कि टावर पर चढ़े दोनों ही कर्मचारियों की बहालीकरण का मामला कोर्ट में विचाराधीन है। कंपनी प्रबंधन मामले में कोई सकारात्मक रुख नहीं अपना रहा है।
फिर उजागर हुई पुलिस प्रशासन की लापरवाही
एसएसपी कार्यालय में मौजूद पुलिस कर्मी अगर थोड़े सजग होते तो शायद मिंडा के कर्मचारी टावर पर नहीं चढ़ पाते। युवक पुलिस की नाक के नीचे टावर पर चढ़ गए और पुलिस को भनक तक नहीं लगी। एसएसपी कार्यालय में बनी कैंटीन के पास जिस वायरलेस टावर पर मिंडा के कर्मचारी चढ़े उसके ठीक नीचे ही पुलिस का गारद रूम है जिसमें हर समय एक हेड कांस्टेबल और तीन सिपाही मौजूद रहते हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि युवकों के टावर पर चढ़ने के दौरान क्या पुलिस कर्मी ड्यूटी पर नहीं थे और अगर थे तो क्यों युवकों को नहीं देख पाए।
राजेंद्र ने तीन दिन पहले भी दी थी आत्मदाह की धमकी
अपनी मांगों को लेकर धरने पर बैठे मिंडा कर्मचारियों के मामले में पुलिस प्रशासन के साथ ही जिला प्रशासन की लापरवाही से भी इंकार नहीं किया जा सकता। तीन दिन पहले जब एएलसी कार्यालय के बाहर अनशन पर बैठे प्रकाश पाठक और मोहन उपाध्याय भी हालत बिगड़ने लगी तो एसडीएम पंकज उपाध्याय ने धरनास्थल पर पहुंचकर उन्हें अस्पताल भिजवाया। बताया जा रहा है कि इस दौरान अनशनकारी राजेंद्र संभल ने उन्हें तीन दिन के भीतर मांगें पूरी नहीं होने पर आत्मदाह की चेतावनी दी थी और गुरुवार को तीसरे दिन ही राजेंद्र अपने साथी जगदीश के साथ केरोसिन की बोतल लेकर टावर पर चढ़ गया।
टावर पर चढ़ते ही कर्मचारियों ने किए फोन बंद
टावर पर चढ़े मिंडा कर्मचारियों को समझाना जिला प्रशासन के लिए तब और टेड़ी खीर हो गया जब उन्होंने टावर पर चढ़ने के बाद अपने मोबाइल बंद कर लिए। जब एसडीएम पंकज उपाध्याय ने टावर पर चढ़े कर्मचारियों के अन्य साथियों से फोन कर उन्हें समझाने को कहा तो फोन बंद होने की जानकारी मिली।
मुझे जवाब नहीं दे सके पर मेरी मां को जरूर देना होगा
एसएसपी कार्यालय के वायरलेस टावर पर चढ़ा राजेंद्र संभल चिल्ला चिल्लाकर लगातार एक ही बात कह रहा था कि कंपनी ने मुझे क्यों निकाला इस बात का जवाब कंपनी प्रबंधन के साथ ही जिला प्रशासन नहीं दे रहा है। मेरे घर में मेरी इकलौती बूढ़ी मां है जिसे मेरे बाद देखने वाला कोई नहीं है। इतने समय तक ना ही किसी ने मुझे जवाब दिया और न मेरे साथ न्याय किया। अब मेरे मरने के बाद मेरी मां को सबको जवाब देना होगा।