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... तो अरुणाचल प्रदेश में खपाई जाती थी शराब

Sat, 03 Feb 2018 01:23 AM IST
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,लखीमपुर खीरी
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डेमो पिक
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शहर से सटे गांव रंगीलानगर में पकड़ी गई अब तक की सबसे बड़ी मात्रा में पकड़ी गई विदेशी नकली शराब में शामिल माफिया के तार अरुणाचल प्रदेश से जुड़े होने की संभावना बढ़ गई है। पुलिस भी इस संभावना से इंकार नहीं कर रही है।
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पूर्व में मंगलवार की रात रामापुर पुलिस चौकी से पांच सौ मीटर दूरी पर सदर कोतवाली पुलिस ने एक गोदाम में छापा मारा था। गोदाम में वैसे तो पुलिस ने 71 पेटी अंग्रेजी शराब की ब्रांड ब्लू मूड और 274 पेटी फ्रेजी रोमियो बरामद की थी। इसके अलावा 32 हजार खाली शीशी (प्लास्टिक) की बरामद होना दिखाई गईं थीं। हालांकि सूत्रों का दावा था कि दो ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में भरकर लाई गई पेटियों की संख्या करीब पांच सौ के आसपास थीं, जबकि पुलिस महज 347 पेटी ही बरामद होने का दावा कर रही है। पेटिको के डिब्बों पर सेल इन अरुणाचल प्रदेश लिखा था। वैसे तो जिले में कहीं से भी अभी तक अरुणाचल प्रदेश की शराब की बिक्री की बात सामने नहीं आई है। इससे कई सवाल खड़े हो गए हैं।
मसलन यदि माफिया इस शराब की खेप को जिले में खपाते थे तो इसकी जानकारी पुलिस और आबकारी विभाग को क्यों नहीं लग सकी? यदि जिले में इस शराब की सप्लाई नहीं की जाती थी तो आखिर बड़े पैमाने पर तैयार की गई नकली शराब को माफिया कहां खपाते थे। शराब व्यवसाय से जुड़े लोगों की मानें तो इस अवैध काले कारोबार में शामिल शराब माफिया के तार अरुणाचल प्रदेश से जुड़े हैं। खाकी और खादी के संरंक्षण में माल की सप्लाई अरुणाचल प्रदेश में की जाती थी। यह माल बड़ी गाड़ियों में अन्य सामान के बीच में छिपाकर भेजा जाता था। इस संभावना से पुलिस भी इंकार नहीं कर रही है। सीओ सिटी आरके वर्मा का कहना है कि शराब व्यवसाय में जुड़े लोगों की जड़े काफी हद तक मजबूत होती हैं। उन्होंने शराब के अरुणाचल प्रदेश में खफाने की संभावना से इंकार नहीं किया है। उनका कहना है कि पूरे मामले की विस्तृत जांच की जाएगा। शीशियों में लिखे टिन नंबर, होलोग्राम आदि की जांच भी कराई जा रही है। जांच में सारे तथ्य उभर कर सामने आ जाएंगे।
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नामजद आरोपियों को गिरफ्तार नहीं कर रही पुलिस
गांव रंगीलानगर में पकड़ी गई नकली शराब की खेप के मामले में पुलिस नामजद आरोपियों को गिरफ्तार करने में कोई रुचि नहीं ले रही है। सूत्रों की मानें तो पुलिस उन्हें कोर्ट में आत्मसमपर्ण के लिए समय दे रही है। शायद यही वजह है कि पुलिस मामले में नामजद किए गए आरोपियों की गिरफ्तारी को लेकर गंभीर नहीं है। न ही कोई दबिश दी जा रही है।
जांच कोतवाली के एक सब इंस्पेक्टर को सौंपी गई है। आरोपियों के घरों पर छापेमारी की गई थी, लेकिन आरोपी नहीं मिले हैं। आरोपियों की गिरफ्तारी के प्रयास जारी हैं।
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केपी गौड़, एसएसआई 
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