दुराचार के बाद नाबालिग की निर्मम हत्या के मामले में विशेष सत्र न्यायाधीश कहकशा खान की अदालत ने अभियुक्त को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अभियुक्त उत्तराखंड पुलिस का बर्खास्त सिपाही है और गिरफ्तारी के दिन से ही न्यायिक अभिरक्षा में पुरसाड़ी कारागार में बंद है।
घटना 13 सितंबर वर्ष 2015 की है। चमोली जिले के एक क्षेत्र के अंतर्गत एक नाबालिग सुबह सात बजे अपने घर से डिब्बे में दूध लेकर किसी परिचित के यहां देने जा रही थी।
तभी एक युवक वीरेंद्र लाल ने उसे अकेला पाकर उससे दुष्कर्म करने के बाद उसकी निर्मम हत्या कर दी। इसके बाद उसने शव पत्थर के नीचे दबा दिया। मृतका के चाचा ने उसी दिन राजस्व पुलिस में नामजद मुकदमा दर्ज कराया। पुलिस ने दुराचार, हत्या और पोक्सो अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए डीएम चमोली ने मामले की जांच राजस्व पुलिस से रेगुलर पुलिस को हस्तांतरित की। जांच के बाद आरोपी के विरुद्ध न्यायालय में आरोप पत्र प्रस्तुत किया गया। सोमवार को विशेष सत्र न्यायाधीश कहकशा खान ने वीरेंद्र लाल को दोषी पाते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। सरकार की ओर से मामले की पैरवी सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता कुलदीप सिंह बर्तवाल ने की।