बीपीओ कर्मी जिगिसा घोष की हत्या मामले में कोर्ट ने पुलिस की उस अर्जी को खारिज कर दिया है जिसमें पांच गवाहों को घटना के सात साल बाद गवाही के लिए बुलाने का आग्रह किया गया था।
अदालत ने कहा मामले में आरोपी सात साल से जेल में हैं और उनकी स्वतंत्रता को इस तरह बाधित नहीं किया जा सकता। अदालत ने कहा कि यह अर्जी बेहद देरी से दायर की गई है और पहले दायर न करने का कोई संतोषजनक उत्तर नहीं दिया गया।
साकेत जिला अदालत के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश संदीप यादव ने अर्जी खारिज करते हुए कहा कि मामले की सुनवाई तकरीबन पूरी हो गई है और अब केवल जांच अधिकारी से जिरह होना बाकी है।
मालूम हो कि वसंत कुंज निवासी जिगिसा घोष 18 मार्च 2009 को गायब हो गई थी। उसका शव दो दिन बाद फरीदाबाद के सूरजकुंड इलाके में बरामद हुआ था। उसे अगवा कर उसकी हत्या कर दी गई थी।
इस मामले में रवि कपूर व उसके साथी गिरफ्तार किए गए थे। पूछताछ के दौरान टीवी पत्रकार सौम्या विश्वनाथन की हत्या का भी खुलासा हुआ था।
अमर उजाला ने पुलिसिया जांच की खामियों को उजागर करते हुए खबर प्रकाशित की थी। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने अर्जी दायर कर कपिल शर्मा समेत पांच अन्य लोगों को गवाह बनाने की अनुमति मांगी थी।