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ब्लैकमेलिंग के लिए इस्तेमाल किया दूतावास का नंबर, भारतीयों से लूटे लाखों

Thu, 29 Sep 2016 02:03 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली
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जर्मनी के बर्लिन में भारतीय दूतावास के नबंर का गलत इस्तेमाल किया गया। बर्लिन में भारतीय दूतावास की साइट पर इस पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा किया गया है। वेबसाइट पर + 4930257950 नबंर बताया गया है, जिसका इस्तेमाल फर्जीवाड़े के लिए किया जा रहा है। इससे भारतीयों को कॉल की गई और उन्हें दस्तावेजोंव में कमी ने नाम प्रताड़ित किया गया।
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कैच न्यूज की खबर के अनुसार बर्लिन की ओर जारी बयान में कहा गया कि यह साइबर क्राइम का हिस्सा है और नंबर का गलत इस्तेमाल किया गया। कॉल करने वाले की पहचान नहीं होती, लेकिन वह कॉल करने में सक्ष्म रहता है।

धोखेबाजों ने खुद को बताया दूतावास का अधिकारी

खुलासे में यह सामने आया है कि फर्जी कॉल करने वाले आरोपी खुद को दूतावास का अधिकारी बताते थे। ये आरोपी भारतीयों को कॉल करके दस्तावेज पूरे नहीं होने का दावा करते और कहते थे कि इसके लिए उन्हें जेल या वापस भारत भेजा जा सकता है।

इतना ही नहीं भारतीयों के पासपोर्ट पर ब्लैक मार्क लगा दिया जाएगा, जोकि उनके लिए भविष्य में दिक्कत बन सकती है। खबर है कि कुछ भारतीय इतना घबरा गए कि उन्होंने अपनी गोपनीय जानकारी फोन करने वाले आरोपियों को दे दी।

पीड़ित ने सोशल मीडिया पर बयां किया दर्द

पीएचडी स्टूडेंट किरण तेलकुंटा और उसकी पत्नी ने ब्लॉग के जरिए यह खुलासा किया। उन्होंने बताया कि एलेक्स जॉनसन नाम के शख्स ने कॉल की। उसने किरण की पत्नी को भी कॉल की और दस्तावेजों में कमी की बात कही। आरोपी ने पीड़िता को धमकी दी की उसने गलत जानकारी दी है और उसे आतंकवादी गतिविधियों से जोड़ा जा सकता है।

सदमे में आए दोनों पति-पत्नी ने आरोपियों से ही सलाह मांगी। प्लान के मुताबिक पीड़ित हर्जाना भुगतने को तैयार हो गए और उन्होंने कुछ पैसा भर भी दिया। लेकिन, दूसरी बार भुगतान से पहले उन्होंने इंटरनेट पर ऐसा ही मामला देखा तो उन्होंने इसकी शिकायत दूतावास में जाकर की।

ब्लॉग में यह भी बताया कि कुछ कॉर्ल्स हिंदी में भी बात करते थे और वह 50 हजार से 1 लाख रुपये की मांग करते थे। किरण ने यह भी बताया कि इन कार्ल्स का गिरोह इतना बड़ा है कि यह हर टारगेट की कई जानकारियां रखते थे।
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दूतावास ने फेसबुक पर पोस्ट डाल दिया सर्तक रहने का संदेश

बताया गया कि फर्जी कॉल के लिए एक नहीं कई नंबरों का इस्तेमाल किया जाता था। फेडरल ऑफिस ऑफ माइग्रेशन, रिफ्यूजी और जर्मनी के विदेश मंत्रालय के नंबरों का इस्तेमाल किया गया। इस बीच दूतावास की ओर से फेसबुक पर पोस्ट जारी किया गया जिसमें पीड़ितों के ब्लॉग को भी जोड़ा गया और लोगों को आगाह किया गया कि वह इस तरह की कॉल के झांसे में नहीं आए। साथ ही इस पोस्ट को पढ़कर अपने जानकारों को सूचित करें।

अकेला जर्मनी ऐसा देश नहीं है, जहां ऐसी फर्जी कॉल कर भारतीयों को टारगेट बनाया गया हो। कुवैत, फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में भी ऐसे ही मामले देखे गए हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए भारतीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने भी लोगों को सचेत रहने की सलाह दी।
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