पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने सीडब्ल्यूपी 1876 ऑफ 2017 का निपटारा करते हुए करनाल के भूमि अर्जन कलेक्टर एवं जिला राजस्व अधिकारी को सरकार द्वारा अधिग्रहण की गई जमीन के भूस्वामी द्वारा भूमि अधिग्रहण अधिनियम की धारा 28 ए के तहत दायर किए गए केस को तीन माह के अंदर निपटाने के निर्देश दिए हैं।
अधिग्रहीत जमीन के मालिकों की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता चौधरी शक्ति सिंह ने बताया कि सरकार ने एचएसआईआईडीसी द्वारा सेक्टर-3 के विकास एवं विस्तार के लिए 11 जुलाई, 2006 को गजट अधिसूचना जारी कर कस्बा करनाल के किसानों की 297 बीघा 8 बिसवा भूमि अधिग्रहण कर भूमि अर्जन कलेक्टर ने 23 जून, 2009 को मुआवजा देने के लिए अपना अवार्ड घोषित किया था।
अतिरिक्त जिला न्यायाधीश विमल सपरा की अदालत ने मुआवजा राशि को बढ़ाकर 40 लाख 20 हजार 884 रुपये प्रति एकड़ की दर अन्य लाभांश सहित छह महीनों के अंदर मुआवजा देने का फैसला दिया था। इस फैसले के आधार पर बहुत से किसानों ने मुआवजा राशि लेने के लिए अधिनियम की धारा 28ए के तहत केस दायर किए हुए हैं, लेकिन भूमि अर्जन कलेक्टर द्वारा तीन साल तक भी केसों का फैसला न करने पर भूस्वामी को आखिर हाईकोर्ट में ही जाना पड़ा, जिस पर अब हाईकोर्ट ने केस को तीन माह में निपटाने के निर्देश दिए हैं।