हाईकोर्ट ने वेंटिलेटर की सुविधा न मिलने से नवजात की मौत के मामले को गंभीरता से लिया है। अदालत ने इस मुद्दे पर केंद्र, दिल्ली सरकार व तीनों नगर निगम को नोटिस जारी कर जवाब-तलब किया है। अदालत ने मामले में स्वयं संज्ञान लेते हुए यह निर्देश दिया है।
मुख्य न्यायाधीश गीता मित्तल व न्यायमूर्ति पीएस तेजी की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि यह अत्यंत गंभीर मामला है कि एक नवजात की मौत मात्र इस कारण हो गई कि उसे समय पर चिकित्सा सुविधा नहीं मिली। अदालत ने केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के सचिव, दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के अलावा तीनों एमसीडी को स्पष्ट करने का निर्देश दिया है कि अस्पतालों में वेंटिलेटर की क्या स्थिति है।
दरअसल, सोशल ज्यूरिस्ट के अधिवक्ता अशोक अग्रवाल ने समाचार पत्रों में नवजात की मौत के मामले में खंडपीठ का ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि जन्म से 15 घंटे में ही जगप्रवेश अस्पताल में नवजात की मात्र इस कारण मौत हो गई कि उसे वेंटिलेटर की सुविधा नहीं मिल पाई। नवजात का परिवार उसे चार अस्पतालों में ले गया।
अधिवक्ता ने सवाल उठाया कि डिजिटल दुनिया के युग में दिल्ली सरकार के अस्पतालों में कनेक्टिविटी की कमी है। यदि कनेक्टिविटी होती तो नवजात को बचाया जा सकता था। अधिवक्ता ने कहा कि मुख्यमंत्री व स्वास्थ्य मंत्री को उन्होंने व्यक्तिगत रूप से ट्वीट भी किया, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। उन्होंने अदालत से आग्रह किया कि इस मामले की उच्च स्तर पर जांच करवाने के अलावा कड़ी कार्रवाई की जाए।