देवरिया। दहेज हत्या के मामले में कोर्ट ने पति, सास और ससुर को दोषी पाते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है। सभी गवाह अपने बयान से मुकर गए लेकिन कोर्ट ने महिला के मजिस्ट्रेट के सामने दिए बयान को सजा के लिए पर्याप्त आधार माना। घटना तीन साल पहले की है। बरहज के देईडीहा गांव के राजेश कुशवाहा की बहन मनोरमा की शादी 2011 में खुखुंदू के परसिया चंदौर निवासी बलवंत पुत्र रामनक्षत्र से हुई थी।
शादी के बाद से ही ससुराल वाले दहेज में बाइक और रुपये की मांग करने लगे। इसको लेकर मनोरमा को प्रताड़ित करते थे। 26 मार्च 2013 को ससुराल वालों ने मनोरमा के शरीर पर केरोसिन तेल डालकर आग लगा दी। गंभीर रूप से झुलसी मनोरमा को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। ससुराल वालों ने मायके वालों को सूचना दिया कि मनोरमा बीमार हो गई है।
जब मायके वाले अस्पताल पहुंचे तो मनोरमा ने पति, सास और ससुर पर जलाने का आरोप लगाते हुए मजिस्ट्रेट के सामने बयान दिया। उसके बाद उसी दिन रात में उसकी मौत हो गई। इस मामले में खुखुंदू थाने में दहेज हत्या का केस दर्ज हुआ।
मुकदमा के दौरान सभी गवाह अपने बयान से मुकर गए। महिला के मरने से पहले दिए गए बयान के खिलाफ कोई खंडन साक्ष्य कोर्ट में पेश नहीं किया। मनोरमा के बयान को पर्याप्त साक्ष्य मानते हुए अपर जिला जज द्वितीय साधना रानी ठाकुर ने पति, सास और ससुर को कठोर कारावास, प्रत्येक अभियुक्त को छह हजार अर्थदंड की सजा सुनाई। सभी को सजा भुगतने के लिए जिला कारागार भेज दिया गया।