केस नंबर एक
एनआईआरएफ 2016-17 में एमएचआरडी को वर्ष 2014-15 का लाइब्रेरी का खर्च छह करोड़ सात लाख 55 हजार बताया गया है। वहीं, एनआईआरएफ 2018 में वर्ष 2014-15 का खर्च 4 करोड़ 32 लाख बताया गया है। इसी तरह एनआईआरएफ 2017 और 2018 में 2015-16 का अंतर भी करीब एक करोड़ साठ लाख 50 हजार रुपये का है। इसस साफ होता है कि बड़े पैमाने पर धांधली की गई है।
केस नंबर दो
आईआईटी में अनुबंध कर्मचारियों की भर्ती में भी धांधली के आरोप हैं। भर्ती के लिए विज्ञापन निकालने की बजाय संस्थान के कर्मचारियों को ई-मेल जारी किया जाता है कि विभिन्न पदों पर भर्ती की जानी है। यदि आपका कोई रिश्तेदार है तो आवेदन करें। अभ्यर्थी को प्राथमिकता दी जाएगी।
केस नंबर तीन
आईआईटी में कर्मचारियों को 5 और 10 फीसदी नहीं बल्कि 45 फीसदी वेतन बढ़ोतरी दी गई। 29 जनवरी 2013 को अनुबंध पर तैनात एक प्रोफेसर को 1 लाख 40 हजार रुपये प्रतिमाह पर नौकरी दी गई। तीन वर्ष बाद इस प्रोफेसर को 45 हजार रुपये की वेतन वृद्धि जबकि, दो वर्ष बाद तीस हजार रुपये की वेतन वृद्धि दी गई, जोकि, आईआईटी के नियमों के विपरीत है।
आईआईटी के कार्यकारी रजिस्ट्रार विशाल सिंह चौहान ने कहा कि मंत्रालय एनआईआरएफ की रिपोर्ट में संस्थान की ओर से आंकड़ों में कोई गलती नहीं हुई है। यह मंत्रालय के एनआईआरएफ विंग की गलती है। वेतन बढ़ोतरी और रिश्तेदारों को नौकरी में प्राथमिकता देने के ईमेल करने के मामले की जांच की जाएगी।