बरेली मंडल में नोटबंदी के बाद 10 लाख रुपये तक की कारों की जमकर बिक्री हुई। इन कारों की खरीद में 500 और एक हजार के पुराने नोट इस्तेमाल किए गए। पौने दो महीने के दौरान कारों की बिक्री 70 फीसदी ज्यादा हुई तो आयकर विभाग चौकन्ना हुआ और इन कारों को बेचने वाले दो दर्जन से अधिक डीलरों को नोटिस जारी किए हैं। इन डीलरों के बाद में कार खरीदने वालों को भी नोटिस जारी करने की आयकर विभाग की तैयारी है। बरेली और मुरादाबाद के आरटीओ से इस अवधि में अस्थायी और स्थायी पंजीकृत वाहनों का ब्योरा भी मांगा है।
आयकर के स्थानीय अधिकारियों को ईडी से मिली जानकारी के अनुसार मारुति, हुंडई, टाटा, महिंद्रा, निसान, होंडा की 10 लाख रुपये तक की कारों की बिक्री में जबरदस्त उछाल आया है। लोगों ने प्रचलन से बाहर करेंसी के 500 और एक हजार के नोट से ये कार खरीदी हैं। 10 लाख रुपये तक की कार खरीदने के पीछे उनकी यह मंशा रही है कि टीडीएस से बचा जा सके, क्योंकि नियमानुसार 10 लाख रुपये तक की कार खरीदने पर टीडीएस नहीं कटता है। आयकर विभाग को आशंका है कि इन दोनों फायदों के लिए ये कार स्वयं या फिर अपने खास लोगों के नाम से खरीदीं गईं हैं।
इस जानकारी के बाद आयकर विभाग ने कारों को खरीदने वालों का ब्योरा मांगा है कि उन्हें भुगतान कैश हुआ है या फिर आरटीजीएस, चेक तथा अन्य माध्यम से। नोटिस का जवाब मिलने के बाद ही इनकम टैक्स विभाग कार खरीदने वालों के खाते खंगालकर अघोषित आय का खुलासा करेंगे। आयकर विभाग की ओर से पहले भी कुछ नोटिस जारी हुए थे लेकिन उनमें गोलमोल जानकारी दी गईं थीं। सटीक जानकारी न मिलने के कारण कार्रवाई ठहर गई थी।