खौड़ पुलिस थाने में युवती से बलात्कार के आरोपी तत्कालीन थाना प्रभारी एसएचओ मोइम्मद इकबाल निवासी माहौर रियासी की जमानत अर्जी रद्द कर दी। यह अर्जी फास्ट ट्रैक कोर्ट के पीठासीन अधिकारी किशोर कुमार ने रद्द की।
पुलिस रिपोर्ट के अनुसार 10 मई, 2016 को पीड़िता ने एसडीपीओ अखनूर के समक्ष रिपोर्ट दर्ज कराई कि वह विक्की कुमार के साथ अपनी मर्जी से गई और दोनों ने शादी कर ली। दोनों ने 28 अक्तूबर 2015 को ही अखनूर कोर्ट में शादी की और कटड़ा चले गए। शाम को उसके पति विक्की कुमार को एक रिश्तेदार का फोन आया।
उसने बताया कि पलांवाला पुलिस विक्की के पिता को चौकी लाई है और पुलिस दोनों को बुला रही है। दोनों 29 अक्तूबर, 2015 को पुलिस पोस्ट पहुंचे। चौकी में पता चला कि लड़की के पिता ने पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई है कि विक्की कुमार ने शिकायतकर्ता का अपहरण किया है। विक्की को खौड़ पुलिस थाने ले जाया गया।
शिकायतकर्ता लड़की को एक महिला पुलिस कांस्टेबल ने एक आवासीय क्वार्टर में रखा। रात के समय उस महिला पुलिस कांस्टेबल ने लड़की को कहा कि वह एसएचओ के कमरे में जाए। वह राजी नहीं हुई और एसएचओ के कमरे में नहीं गई। दूसरे दिन पीड़िता को थाने लाया गया। एक महिला एसपीओ ममता देवी थाने में एसएचओ के कमरे में ले गई।
जब वह एसएचओ के कमरे में पहुंची तो जबरन उसके साथ बलात्कार किया गया। दो घंटे तक कमरे में रखा। ममता देवी ने उसे धमकी दी कि इस घटना को किसी को भी जानकारी नहीं दे। नहीं तो उसके पति को जेल में डाल दिया जाएगा। इस धमकी के कारण लड़की ने कोई भी बात किसी को नहीं बताई।
इसके बाद 31 अक्तूबर, 2016 को शिकायतकर्ता व उसके पति को अखनूर कोर्ट ले जाया गया। लड़की ने बयान दिया कि वह बालिग है और अपने पति के साथ जाना चाहती है। दोनों अपने घर चले गए। इसके बाद भी उसे तंग किया जाता रहा।
लड़की के बयान पर पुलिस ने केस दर्ज किया। कोर्ट में बयान हुए और आरोपियों की शिनाख्त भी कराई गई। पीठासीन अधिकारी ने सीनियर एडवोकेट सुनील सेठी और एडिशनल प्रोसीक्यूटिंग अफसर विजय शर्मा की दलीलों के बाद पाया कि मामला गंभीर है। इस मामले में आरोपी को जमानत नहीं दी जा सकती है।