युवराज सिंह के लिए टी-20 वर्ल्ड कप बेहद खास है क्योंकि इसी टूर्नामेंट का वो आखिरी मैच था जिसने उन्हें टीम इंडिया के लिए नायक से 'खलनायक' बना दिया। 2 साल पहले ढाका में खेले गए इसी टूर्नामेंट में फाइनल मैच में युवराज के ही कारण टीम को हार मिली थी।
यह वही मैच था जिसने युवराज को टीम इंडिया का विलेन बनाकर रख दिया और टीम में बाहर होना पड़ा। फिर इसके बाद उन्हें टीम में लौटने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगाना पड़ गया। 6 अप्रैल, 2014 को ढाका में भारत और श्रीलंका के बीच खेले गए खिताबी मैच में भारत को 6 विकेट के हार मिली थी।
बेहद अप्रत्याशित तरीके से युवराज उस मैच में बुरी तरह से नाकाम रहे। वह 21 गेंदों में 11 रन ही बना सके और एक भी चौका नहीं लगा पाए। उनकी नाकामी के कारण टीम बड़ा स्कोर खड़ा नहीं कर सकी और 20 ओवर में 4 विकेट पर 130 रन ही बना सकी। बाद में श्रीलंका ने आसानी से 13 गेंद शेष रहते मैच जीत लिया। उस मैच में विराट कोहली ने 77 रनों की पारी खेली, लेकिन युवी की नाकामी ने उनके प्रयास को बेकार साबित कर दिया।
उस मैच से करीब 2 साल बाद अब न सिर्फ युवराज बल्कि टीम इंडिया भी एक बार फिर टी-20 वर्ल्ड कप में उतरने जा रहे हैं। यह मैच टीम इंडिया के लिए खास है क्योंकि इस मैच से वह टूर्नामेंट में अपने अभियान का आगाज करने जा रही है तो बाएं हाथ के ऑलराउंडर का भी इस टूर्नामेंट में पिछली नाकामी के बाद पहला ही मैच है।
अब यह सवाल सभी के मन में है कि युवराज क्या इस बार टीम के खिताबी अभियान के लिए 'ट्रंप कार्ड' होंगे या फिर 'रिस्क' ही बनेंगे। हालांकि आज पहला ही मैच है तो इस बारे में अभी कुछ भी कहना संभव नहीं है। इस साल जनवरी में टी-20 के जरिए टीम इंडिया में लौटे युवी ने कुछ मैचों में बेहद शानदार शॉट लगाए हैं और उन्होंने माना भी कि उनका पुराना अंदाज लौट आया है, अब देखना होगा कि जिस टूर्नामेंट के फाइनल मैच से वो विलेन बने उसी में इस बार लाजवाब प्रदर्शन कर टीम को दूसरी बार चैंपियन बनाए।