भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) का सेंटर ऑफ एक्सीलेंस भारतीय क्रिकेट के भविष्य को तैयार करने का अहम केंद्र माना जाता है। पिछले साल ट्रॉय कूली के पद छोड़ने के बाद से तेज गेंदबाजी कोच का पद खाली है। बीसीसीआई ने पहले किसी विदेशी विशेषज्ञ को लाने की कोशिश की थी और इंग्लैंड के तेज गेंदबाजी कोच स्टीफन जोंस से बातचीत भी हुई थी, लेकिन मामला आगे नहीं बढ़ पाया। अब बोर्ड भारतीय कोचों पर भरोसा करने के मूड में नजर आ रहा है।
वीआरवी सिंह और बालाजी सबसे आगे
सूत्रों के मुताबिक पूर्व भारतीय तेज गेंदबाज वीआरवी सिंह और लक्ष्मीपति बालाजी इस रेस में सबसे आगे हैं। वीआरवी सिंह पहले भी ट्रॉय कूली के साथ काम कर चुके हैं, जिससे उन्हें सीओई के सिस्टम की अच्छी समझ है। वहीं बालाजी घरेलू और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का लंबा अनुभव रखते हैं, जो युवा गेंदबाजों के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है।
तीसरे पेस बॉलिंग कोच के तौर पर कृष्णकुमार
पी कृष्णाकुमार का नाम भी तेज गेंदबाजी कोच की सूची में शामिल है। उन्होंने जम्मू-कश्मीर टीम के गेंदबाजी कोच के रूप में शानदार काम किया और टीम को ऐतिहासिक रणजी ट्रॉफी खिताब दिलाने में बड़ी भूमिका निभाई। उनके मार्गदर्शन में आकिब नबी, सुनील कुमार और युधवीर सिंह जैसे गेंदबाज उभरे।
बल्लेबाजी और फील्डिंग कोच भी तय होने के करीब
पूर्व कर्नाटक ऑलराउंडर येरे गूड को बल्लेबाजी कोच बनाया जा सकता है। फील्डिंग कोच की रेस में दिषांत यागनिक का नाम चर्चा में है, जो फिलहाल कोलकाता नाइट राइडर्स के साथ काम कर रहे हैं। इसके अलावा मिलाप मेवाडा और शबरिश मोहन भी सूची में शामिल बताए जा रहे हैं।
महिला कोचिंग स्टाफ में भी बदलाव संभव
सूत्रों के अनुसार सुनेत्रा परांजपे, नूशीन अल खदीर और वीआर वनीता को भी सीओई में कोचिंग जिम्मेदारियां मिल सकती हैं। बीसीसीआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में ये बदलाव भारतीय क्रिकेट के भविष्य के लिए अहम माने जा रहे हैं। अगर वीआरवी सिंह, बालाजी और अन्य पूर्व खिलाड़ी जिम्मेदारी संभालते हैं, तो युवा प्रतिभाओं को अनुभवी मार्गदर्शन मिलेगा और भारतीय क्रिकेट की नींव और मजबूत होगी।