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T20 WC: टी20 विश्वकप में बवाल से खुश हैं नासिर हुसैन! घटिया बयान देकर बांग्लादेश-पाकिस्तान की पीठ थपथपाते दिखे

Thu, 05 Feb 2026 11:41 AM IST
स्वप्निल शशांक स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, लंदन

सार

नासिर हुसैन का बयान क्रिकेट को जोड़ने के बजाय उसे और बांटता नजर आता है। ICC और BCCI पर सवाल उठाना एक बात है, लेकिन बहिष्कार और अव्यवस्था को पसंद करना क्रिकेट की भावना के खिलाफ लगता है। टी20 वर्ल्ड कप जैसे बड़े मंच पर जिम्मेदारी और अनुशासन की जरूरत होती है, न कि ऐसे बयान, जो राजनीति को खेल से ऊपर खड़ा कर दें।
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नासिर हुसैन और बाबर आजम - फोटो : ANI
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विस्तार
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टी20 विश्वकप 2026 से पहले पहले ही राजनीति और बहिष्कार के साये में फंसे क्रिकेट को लेकर अब एक नया विवाद खड़ा हो गया है। इंग्लैंड के पूर्व कप्तान नासिर हुसैन ने इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (ICC) और भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) पर तीखा हमला बोलते हुए बांग्लादेश और पाकिस्तान के रुख का खुला समर्थन किया है। हुसैन का यह बयान कई क्रिकेट प्रेमियों को पक्षपाती और गैर-जिम्मेदाराना लग रहा है।
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आईसीसी और बीसीसीआई पर नासिर हुसैन का हमला
स्काई स्पोर्ट्स पॉडकास्ट पर माइकल एथर्टन के साथ बातचीत में नासिर हुसैन ने आरोप लगाया कि आईसीसी बड़े और ताकतवर बोर्ड्स, खासकर भारत, के साथ नरमी बरतता है। उन्होंने सवाल उठाया, 'अगर भारत टूर्नामेंट से ठीक पहले यह कह दे कि उसकी सरकार किसी देश में खेलने की इजाजत नहीं दे रही, तो क्या आईसीसी उतना ही सख्त रुख अपनाता?' उनका यह बयान सीधे तौर पर भारत को कटघरे में खड़ा करता है, जबकि मौजूदा विवाद की जड़ बांग्लादेश और पाकिस्तान के फैसले हैं।

बांग्लादेश-पाकिस्तान के बहिष्कार का समर्थन
नासिर हुसैन ने खुलकर कहा, 'मुझे अच्छा लगता है कि बांग्लादेश अपने खिलाड़ियों के लिए डटा रहा। और मुझे यह भी पसंद है कि पाकिस्तान ने बांग्लादेश का समर्थन किया।' यहीं से आलोचना तेज हो जाती है। सवाल यह है कि क्या आईसीसी टूर्नामेंट जैसे वैश्विक आयोजन में बहिष्कार को अच्छा कहना क्रिकेट की भावना के अनुरूप है?

कंसिस्टेंसी की बात, लेकिन जिम्मेदारी से किनारा
हुसैन ने कहा, 'सबको बस एक ही चीज चाहिए, निरंतरता। बांग्लादेश, पाकिस्तान और भारत के साथ एक जैसा व्यवहार होना चाहिए।' उन्होंने यह भी जोड़ा, 'पावर के साथ जिम्मेदारी आती है।' हालांकि, फैंस का कहना है कि हुसैन ने यह नहीं बताया कि अनुबंध तोड़ना, मैच न खेलना और अंतिम समय पर टूर्नामेंट को संकट में डालना किस तरह जिम्मेदारी का उदाहरण है।

न्यूट्रल वेन्यू भी फेल?
भारत के पाकिस्तान न जाने के फैसले के बाद आईसीसी ने न्यूट्रल वेन्यू का फॉर्मूला लागू किया था। इसके बावजूद पाकिस्तान ने 15 फरवरी को होने वाले भारत के खिलाफ ग्रुप मैच से खेलने से इनकार कर दिया। हैरानी की बात यह है कि पाकिस्तान ने अब तक इस फैसले की औपचारिक सूचना आईसीसी को भी नहीं दी है।

नजम सेठी का भी भारत पर आरोप
पीसीबी के पूर्व चेयरमैन नजम सेठी ने भी इस मौके पर बीसीसीआई पर हमला बोला और कहा, 'हर स्तर पर बीसीसीआई ने दूसरे बोर्ड्स को दबाया है।' उन्होंने 'बिग थ्री मॉडल' का जिक्र करते हुए इसे असमान बताया और पुराने भारत-पाकिस्तान द्विपक्षीय विवादों को फिर से उठाया।
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रोने वालों के साथ नासिर हुसैन!
आश्चर्य की बात तो यह है कि यह वही नासिर हुसैन हैं जो डेढ़ साल पहले पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड में अव्यवस्था पर खुलकर बोलते नजर आए थे। तब उन्होंने पीसीबी की बखिया उधेड़ रख दी थी और कहा था कि पीसीबी हर चीज में रोना बंद करे। अब वही नासिर हुसैन रोने वालों के साख खड़े नजर आ रहे हैं। अक्तूबर 2024 में नासिर हुसैन ने कहा था- 
  • पाकिस्तान क्रिकेट की समस्या खिलाड़ी नहीं, सिस्टम है। बाबर आजम, शाहीन अफरीदी या नसीम शाह को दोष देना आसान है, लेकिन असली गड़बड़ी पर्दे के पीछे है।
  • असली समस्या यह है कि पाकिस्तान क्रिकेट कैसे चलाया जा रहा है। पीसीबी में लगातार बदलाव सबसे बड़ी कमजोरी है। चयनकर्ता, कोच और कप्तान बार-बार बदले जाते हैं, जिससे कोई दीर्घकालिक योजना बन ही नहीं पाती।'
  • पाकिस्तान में अब तक 26 या 27 चयनकर्ता बदल चुके हैं, जबकि इंग्लैंड में इतने वर्षों में सिर्फ दो-तीन ही बदले। जब नेतृत्व बार-बार बदला जाता है, तो फैसले तुरंत और घबराहट में लिए जाते हैं।
  • कोई भी सफल बिजनेस या खेल टीम ऐसे नहीं चलती। शॉर्ट-टर्म सोच आपको हर बार बिना तैयारी के छोड़ देती है। कई बार पीसीबी खुद अपने पैर पर कुल्हाड़ी मार लेता है।
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