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सुशील दोशी की कलम से: ऑस्ट्रेलिया एक बार फिर भारत को चुनौती देने के लिए तैयार, भारतीय कर रहे उत्सव का इंतजार

सार

ऑस्ट्रेलिया ने दक्षिण अफ्रीका को कोलकाता के ईडन गार्डन्स में खेले गए सेमीफाइनल मुकाबले में हरा दिया। इस जीत के साथ कंगारुओं ने टीम इंडिया के साथ फाइनल की सीट पक्की की। 19 नवंबर को फाइनल खेला जाएगा। मशहूर कमेंटेटर सुशील दोशी ने अपनी राय रखी है। आइए जानते हैं...
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सुशील दोशी की कलम से - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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नमस्कार मैं सुशील दोशी एक बार फिर से आपका स्वागत करता हूं। विश्व कप के मुकाबले के फाइनल के दो प्रतिद्वंद्वी भी अब बिल्कुल साफ हो गए हैं। मतलब यह कि भारत तो पहले ही पहुंच गया था फाइनल में और इंतजार कर रहा था कि दक्षिण अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया के मैच में कौन जीतेगा और आखिरकार वही हुआ जिसकी कल्पना की जा रही थी कि ऑस्ट्रेलिया आखिरकार जीत गया।
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हालांकि, गिरते पड़ते जीता बड़ी मुश्किल से जीता और दक्षिण अफ्रीका की वही दिक्कतें सामने आईं कि सब कुछ ठीक चल रहा था। बल्लेबाजी में उन्होंने आकर एक ऐसा स्कोर खड़ा कर दिया था जहां से संघर्ष किया जा सके। 24 पर चार विकेट गिर गए थे और लग रहा था कि दक्षिण अफ्रीका परास्त हो जाएगा बहुत जल्दी ही और 100 रन के अंदर ही सिमट जाएगा, लेकिन बाद में आपने देखा डेविड मिलर ने जिस तरह की पारी खेली शतक बनाया, आक्रामक पारी खेली और स्कोर को वहां तक पहुंचाया, जहां की ऑस्ट्रेलिया के लिए मुश्किलें वह पैदा कर सकते थे।

पता नहीं टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी चुनना उनके लिए भारी पड़ा क्योंकि ओवरकास्ट थी, आसमान में बादल थे भारतीय वातावरण था, पिच नया था, टप्पा खा कर गेंद सीम हो रही थी और ऑस्ट्रेलियाई सीमर्स ने इसका बड़ा फायदा उठाया। स्टार्क ने खास करके बहुत अच्छी बॉलिंग कि। अब तक वह काफी रन लूटा रहे थे इस टूर्नामेंट में, लेकिन यहां जब मौका मिला न तो उन्होंने बहुत अच्छी बॉलिंग की। मैं हमेशा कहा करता हूं कि ऑस्ट्रेलियाई टीम जो है न, जैसे ही बड़ा मौका आता है बड़ा प्रदर्शन कर देती है।
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हेजलवुड ने भी सभी बल्लेबाजों को खामोश रखा और कुल मिलाकर अपनी जीत के द्वार उन्होंने खोल दिए। जब बाद में ऑस्ट्रेलियाई ने बल्लेबाजी की तो लग रहा था कि बहुत ही आसानी से मैच जीत रहा है, लेकिन उसके बाद फिर स्पिनर्स जैसे आए गेंद स्पिन ज्यादा होने लगी थी। बाद में दोनों अफ्रीकी स्पिनर्स शम्सी और केशव महाराज इन्होंने काफी बांध कर रखा और ऑस्ट्रेलिया को काफी हद तक पीछे खींच दिया और एक समय तो ऐसा लग रहा था कि दक्षिण अफ्रीका यह मैच जीत भी सकता है। लेकिन फील्डिंग दक्षिण अफ्रीका की बहुत खराब रही।

जहां एक तरफ ऑस्ट्रेलिया ने अपने कई कैच लपके और कई कैच तो ऐसे थे जो बहुत मुश्किल थे, लेकिन फिर भी सभी कैच उन्होंने लपक लिए और दूसरी तरफ दक्षिण अफ्रीका ने नाजुक मौकों पर कैच टपकाए। इसीलिए मैं कहता हूं कि पकड़ो कैच, जीतो मैच या फिर उसके विपरीत यह कहा जा सकता है कि छोड़ो कैच, हारो मैच। दक्षिण अफ्रीका एक बार फिर से जो चोकर्स की भूमिका उनको दी जाती है कि बड़े मुकाबले में वो ठंडे पड़ जाते हैं, चोक हो जाते हैं। एक बार उसी का उन्होंने परिचय दिया।

सेमीफाइनल तक जरूर पहुंचे, लेकिन फिर भी जो सपना था उनका यह टूर्नामेंट में फाइनल तक पहुंच कर टूर्नामेंट जीतने का, दक्षिण अफ्रीका कभी भी ये टूर्नामेंट जीता नहीं। ऑस्ट्रेलिया तो पांच बार का विजेता है और एक बार फिर से वह फाइनल में भारत के सामने चुनौती देने के लिए खड़ा है जो 19 नवंबर को फाइनल का मैच खेला जाएगा।

देखिए भारत में तो दोनों प्रतिद्वंद्वी कोई भी पहुंचता फाइनल में दोनों को हरा चुका है लीग स्टेज में और बहुत ही आसानी से हरा चुका। ऑस्ट्रेलिया को भी पराजित किया, दक्षिण अफ्रीका को तो बहुत बुरी तरह से पराजित किया था। इसलिए भारत के लिए कोई चिंता का विषय नहीं है। सवाल यही है कि जीत की लय बरकरार रहनी चाहिए। सवाल यही है कि क्या भारतीय बॉलर्स उसी तरह की लय और उसी तरह का तेजस्वीता कायम रख पाएंगे जो अब तक उन्होंने की और प्रतिद्वियों को 50 ओवर्स के पहले ही आउट करने की जो उनके परंपरा है, क्या उसे वह कायम कर पाएंगे?

दूसरी बात यह कि ऑस्ट्रेलिया इतनी ज्यादा लड़खड़ाने के बाद भारत से पहले पराजित होने के बाद, बड़े मुकाबले में बेहतर प्रदर्शन कर पाएगा। ऑस्ट्रेलिया की टीम एक जुझारू टीम है। मैं हमेशा कहा करता हूं कि उनके 11 साधारण खिलाड़ी भी हो ना यह बहुत महान टीम नहीं है, यह एलेन बॉर्डर की टीम नहीं है, लेकिन फिर भी यह टीम इतनी बड़ी टीम है, भले ही स्टीव वॉ की तरह बड़ी टीम न हो, लेकिन फिर भी बड़े मौकों पर यह टीम अच्छा प्रदर्शन करने के लिए विख्यात है।

अहमदाबाद के मोटेरा पर होने वाला फाइनल मुकाबला बहुत ही जबरदस्त होने वाला है। आइए हम सब इंतजार करें कि भारत किस तरह से इस चुनौती को पार कर सकता है। टूर्नामेंट अंतिम पड़ाव पर है, फाइनल आ गया है और मानसिक दृढ़ता की बात है। पूरा देश इंतजार कर रहा है कि भारत को एक बार फिर से उत्सव मनाने का मौका मिले। 1983 और 2011 के वगैरह के बाद जो सूखा पड़ा हुआ था, वो सूखा समाप्त हो और भारतीय आत्माएं क्रिकेट के टूर्नामेंट के विजेता के रूप में फिर से तृप्त हों। धन्यवाद। नमस्कार।
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