पूर्व पाकिस्तानी क्रिकेटर राणा नावेद उल हसन ने भी अपने साथ हुए नस्लभेद का अनुभव साझा किया है। राणा ने कहा है कि इंग्लैंड में उन्हें भी नस्लभेद का सामना करना पड़ा है। राणा ने बताया कि 2008-09 में वो यॉर्कशायर की ओर से खेले थे लेकिन स्टेडियम में उन्हें गालियां दी जा रही थीं।
ऐसे अनुभवों के बाद उन्हें आत्महत्या करने का कई बार मन किया। इससे पहले पाकिस्तानी मूल के इंग्लिश अंडर-19 कप्तान अजीम रफीक ने भी नस्लभेद का सामना किया था। उन्होंने बताया कि यॉर्कशायर के दौरान उन्हें कई बार प्रताड़ना झेलनी पड़ती थी। साथ ही कई बार खुदकुशी करने के भी ख्याल आते थे।
अजीम ने बताया कि यॉर्कशायर टीम मैेनेजमेंट भी उनके साथ नस्लभेदी व्यवहार करता था। इस पर राणा ने कहा कि वो अजीम रफीक की बात से पूरी तरह से सहमत हैं, उन्होंने जो कुछ कहा है, वो सही और सच है। राणा ने बताया कि ऐसा उनके साथ भी हुआ है।
इसके अलावा राणा का कहना है कि घरेलू फैंस की ओर तानेबाजी ज्यादा देखने को मिलती है। उनका कहना है कि अगर आप एशियाई खिलाड़ी हैं और आप अच्छा नहीं खेल रहे हैं तो घरेलू फैन्स को आपका समर्थन करना चाहिए लेकिन ऐसा होता नहीं है। ऐसा करने के बजाय भीड़ ताने और गालियां देती है।
राणा का कहना है कि मैच में खराब प्रदर्शन शुरू होते ही भेदभाव शुरू हो जाता है। राणा ने कहा कि क्रिकेट के दौरान जब विकेट नहीं मिलता है तो स्टेडियम का पूरा माहौल बदल जाता है। राणा ने बताया कि उनके साथ भी ऐसा ही भेदभाव किया गय। उन्हें छोटे होटल में ठहरने के लिए कहा गया। राणा ने कहा कि इन परेशानियों की वजह से कभी-कभी आत्महत्या करने का मन होता था।
उधर, अजीम का कहना है कि परिवार का सपना था कि मैं बड़ा प्रोफेशनल क्रिकेटर बनूं और मैं यही करना चाहता था। लेकिन वास्तव में मैं अंदर से खत्म हो चुका था। अजीम ने बताया कि स्टेडियम में जाते समय डर लगता था। अजीम ने कहा कि उनकी पत्नी को मृत बच्चा पैदा हुआ था, जिसे वो अस्पताल से सीधा दफनाने जा रहे थे।
अजीम ने बताया कि यॉर्कशायर ने मदद का वादा किया था लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। क्लब की तरफ से एक छोटा सा मेल कर जानकारी दी गई कि उन्हें क्लब से बाहर निकाल दिया गया है। अजीम ने कहा कि मेरे साथ जो बहुत भयानक और खतरनाक था।