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T20 WC: 'बेइज्जती करवाना अगर खेल होता, तो पाकिस्तान उसमें चैंपियन होता!' बहिष्कार ड्रामे पर PAK की उड़ी खिल्ली

Tue, 10 Feb 2026 05:17 PM IST
स्वप्निल शशांक स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

सोशल मीडिया पर फैंस ने पाकिस्तान की बेइज्जती करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। सबने एक सुर में यही कहा, 'शुरू में ही कहा था ऐसा होगा। पाकिस्तान यू-टर्न लेगा।' और आखिर में ऐसा ही हुआ भी। पाकिस्तान अब 15 फरवरी को भारत के खिलाफ कोलंबो में मैच खेलेगा।
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नकवी और शहबाज शरीफ हुए ट्रोल - फोटो : Twitter
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विस्तार
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टी20 विश्वकप 2026 में पाकिस्तान के ड्रामे पर अब सोशल मीडिया पर उनकी जमकर खिल्ली उड़ रही है। फैंस मीम्स बनाकर पाकिस्तान की धज्जियां उड़ा रहे हैं। दरअसल, सोमवार को पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ मैच के बहिष्कार के फैसले पर यू-टर्न ले लिया। पाकिस्तानी सरकार ने सोमवार देर रात यह एलान किया कि उनकी क्रिकेट टीम अब 15 फरवरी को भारत के खिलाफ कोलंबो में होने वाले मैच में मैदान पर उतरेगी। इसी के साथ नौ दिन से चले आ रहे पाकिस्तान के ड्रामे पर विराम लग गया।
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सलमान आगा और सूर्यकुमार यादव - फोटो : PTI
सोशल मीडिया पर मीम्स की बाढ़
इसके तुरंत बाद सोशल मीडिया पर फैंस ने पाकिस्तान की बेइज्जती करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। सबने एक सुर में यही कहा, 'शुरू में ही कहा था ऐसा होगा। पाकिस्तान यू-टर्न लेगा।' कुछ फैंस ने यहां तक कह दिया कि पाकिस्तान की भारत से दिक्कत इतनी ज्यादा है कि कोई थेरेपिस्ट भी इसे ठीक नहीं कर सकता।

नकवी ने खुद का मजाक बनवाया - फोटो : Twitter
एक मीटिंग और पाकिस्तान का यू-टर्न
दरअसल, जब एक फरवरी को पाकिस्तान ने बड़े जोश के साथ भारत के खिलाफ मैच नहीं खेलने की धमकी दी थी, तभी ज्यादातर लोगों ने कह दिया था, इन्हें आखिर में खेलना ही पड़ेगा। आठ फरवरी तक पाकिस्तान ने बड़े जोश और गर्व के साथ इस फैसले का ढिंढोरा पीटा। फिर उनकी आईसीसी के उपाध्यक्ष और स्वतंत्र निदेशक इमरान ख्वाजा के साथ मीटिंग हुई, जिसमें बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड के अध्यक्ष अमीनुल इस्लाम भी मौजूद रहे। इस मीटिंग के बाद बांग्लादेश ने ही पाकिस्तान से मैच के बहिष्कार की मांग वापस लेने की मांग कर दी। जिस बांग्लादेश के दम पर पाकिस्तान इतना कूद रहा था, उसके ऐसा कहते ही पाकिस्तान बैकफुट पर आ गया।

नकवी और शहबाज शरीफ - फोटो : Twitter/ANI
नकवी और शहबाज रहे ट्रोल्स के निशाने पर
यहीं से मीम का दौर शुरू हुआ और देर रात तक पाकिस्तान सरकार का ऑफिशियल स्टेटमेंट भी आ गया। एक से लेकर आठ फरवरी तक, पाकिस्तानी फैंस से लेकर वहां के कई पूर्व क्रिकेटरों ने पीसीबी के भारत के खिलाफ न खेलने के फैसले की सराहना की थी, लेकिन पाकिस्तान सरकार ने जैसे ही यू-टर्न लिया, अब तक किसी का बयान नहीं आया है। इसने पाकिस्तानी क्रिकेट बोर्ड से लेकर मोहसिन नकवी और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और वहां के पूर्व क्रिकेटरों का भी मजाक बना दिया है। पाकिस्तानी सरकार का फैसला आते ही सोशल मीडिया पर मीम्स की बाढ़ आ गई। 




मोहसिन नकवी-शहबाज शरीफ - फोटो : ANI
पाकिस्तान की क्षमता पर सवाल
मीम्स में ज्यादातर हमले पीसीबी चेयरमैन मोहसिन नकवी और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ पर ही केंद्रित रहे। फैंस ने पाकिस्तान के फैसले लेने की क्षमता पर सवाल खड़े किए और उसका मजाक उड़ाया। बहिष्कार का एलान, फिर एक हफ्ते तक खूब शोर और फिर यू-टर्न...इस स्क्रिप्ट ने पाकिस्तान को कटघरे में खड़ा कर दिया। यही स्क्रिप्ट वह पिछले कई महीनों से लगभग हर टूर्नामेंट में लिखते आ रहे हैं। एशिया कप में भी उन्होंने ऐसा ही किया था। रेफरी एंडी पायक्रॉफ्ट से विवाद के बाद पाकिस्तान ने यूएई के खिलाफ मैच का बहिष्कार करने की धमकी दी थी और फिर खेलने पहुंच गए थे।
 
  • एक सोशल मीडिया यूजर ने लिखा, 'इतना सारा शोर और हुआ कुछ नहीं। आखिरकार भारत पाकिस्तान मैच पर फैसला हो ही गया। यह ड्रामा पीसीबी ने इसलिए तैयार किया ताकी भारत पाकिस्तान मैच का हाइप बन सके।'
  • दूसरे यूजर ने लिखा, 'पाकिस्तान को झुकने और बहिष्कार से पीछे हटने के लिए दबाव बनाया गया। जय शाह के सामने पाकिस्तान की एक न चली। मैंने पाकिस्तान और पाकिस्तानी प्रधानमंत्री से बड़ा मजाक आज तक नहीं देखा।'
  • तीसरे यूजर ने लिखा, 'अगर बात-बात पर बेइज्जती करवाना कोई खेल होता, तो पाकिस्तान उसमें जरूर चैंपियन बनता।'

मोहसिन नकवी - फोटो : ANI
सच्चाई क्या थी?
  • असली सच्चाई यही है कि पाकिस्तान को भारत के खिलाफ मैच की जरूरत किसी और बोर्ड या काउंसिल से ज्यादा है। पैसे, राजनीति, दर्शक, सब कुछ इससे जुड़ा था।
  • अगर टीम नहीं उतरती तो ब्रॉडकास्टर्स छूट मांगते, स्पॉन्सर नाराज होते और फैंस सबसे पहले सवाल पूछते। इसलिए वापसी तय थी।
  • बस समय का इंतजार था और आखिरकार…ठीक वैसा ही हुआ जैसा पहले दिन से कहा जा रहा था। पाकिस्तान खेलेगा।
  • बयान अब यह है कि बातचीत हुई, न्याय मिला, सिद्धांत बचा लिया गया। तकनीकी रूप से यह सब सही लग सकता है, लेकिन दुनिया ने देखा कि असली धमकी कब खत्म हुई, जब हिसाब लगाया गया।

छवि पर असर
इस पूरे प्रकरण ने एक बात फिर सामने रख दी, ऊंची आवाज में सिद्धांत की बात करना आसान है, लेकिन जब गणित सामने आता है तो फैसले बदलते देर नहीं लगती। आईसीसी ने राहत की सांस ली, बांग्लादेश जुर्माने से बच गया, पर टूर्नामेंट से बाहर हो गया, और पाकिस्तान वहीं पहुंचा जहां उसे होना ही था...मैदान पर।
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जय शाह-पाकिस्तान टीम-मोहसिन नकवी - फोटो : ANI/PTI
अब आगे क्या?
  • 15 फरवरी को जब टीमें उतरेंगी तो स्टेडियम भरा होगा, टीवी रेटिंग आसमान छुएगी। लोग चौके-छक्के याद रखेंगे, यह हफ्ते भर का ड्रामा नहीं, लेकिन पर्दे के पीछे की कहानी दर्ज हो चुकी है।
  • वो कहावत है न, 'कोयला होय न ऊजलौ, सौ मन साबुन लाय।' यानी फितरत बदलना आसान नहीं होता। इसलिए अगर भविष्य में फिर कभी पाकिस्तान की ऐसी कोई नई धमकी, नया बहिष्कार या नया अल्टीमेटम सुनाई दे, तो दुनिया शायद उतनी हैरान नहीं होगी।
  • लोग पहले ही मानकर चलेंगे कि यह स्क्रिप्ट का हिस्सा है, अंत में पाकिस्तान का यू-टर्न तय है। सबसे बड़ा नुकसान यही है। जब बार-बार पलटना आदत बन जाए, तो शब्दों की साख खत्म हो जाती है।
  • अगली बार चाहे पाकिस्तान का बयान कितना भी ऊंचा क्यों न हो, प्रतिक्रिया यही होगी, रुको, कुछ दिन में फैसला बदल जाएगा।
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