एमएस धोनी ने युवा पीढ़ी को बदलती जीवनशैली, फास्ट फूड और घटती शारीरिक गतिविधियों के प्रति आगाह किया। उन्होंने बच्चों को बचपन से खेलों से जोड़ने और रोजाना एक घंटा फिटनेस के लिए निकालने की सलाह दी। धोनी के मुताबिक, खेल न केवल शरीर को सक्रिय रखते हैं, बल्कि असफलता से निपटना और अपनी कमियों को सुधारना भी सिखाते हैं।
भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान एमएस धोनी ने युवा पीढ़ी को फिटनेस और सेहत को प्राथमिकता देने की सलाह दी है। उन्होंने बदलती जीवनशैली, खानपान की आदतों और शारीरिक गतिविधियों में आ रही कमी पर चिंता जताते हुए कहा कि लोगों को अपनी सेहत के लिए रोजाना समय निकालना चाहिए। धोनी के मुताबिक, खेल और फिटनेस से जुड़ी आदतें कम उम्र से ही विकसित करनी चाहिए, ताकि बढ़ती उम्र में भी लोग स्वस्थ जीवन जी सकें।
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लेखक और गीतकार जावेद अख्तर के साथ एक कार्यक्रम में शामिल हुए धोनी ने कहा कि आधुनिक जीवनशैली में लोग कामकाज, घंटों बैठकर काम करने और जल्दी तैयार होने वाले खाने के बीच अपनी सेहत को नजरअंदाज कर रहे हैं। उन्होंने लोगों से खेलों को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाने और स्वास्थ्य को भविष्य के लिए निवेश की तरह देखने की अपील की।
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धोनी
- फोटो : ANI
बदलती जीवनशैली और खानपान पर क्या बोले धोनी?
धोनी ने बताया कि भारत में पारंपरिक खानपान की आदतें उस समय विकसित हुई थीं, जब लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी में शारीरिक मेहनत काफी अधिक होती थी। हालांकि, अब खानपान की वे आदतें तो जारी हैं, लेकिन शारीरिक गतिविधियां काफी कम हो गई हैं। उन्होंने कहा, ‘अब वही खाना नई पीढ़ी तक पहुंच गया है, लेकिन शारीरिक गतिविधियां काफी कम हो गई हैं।’
धोनी ने समझाया कि पहले लोग रोजमर्रा के कामों के दौरान भी काफी चलते-फिरते थे, जबकि अब आने-जाने के लिए वाहनों पर निर्भरता बढ़ गई है और कई लोग घंटों कुर्सी पर बैठकर काम करते हैं। इसके साथ ही फास्ट फूड, मीठे और तले हुए खाद्य पदार्थों का सेवन भी बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसे खानपान और कम सक्रिय जीवनशैली के बीच फिटनेस पर ध्यान देना जरूरी है।
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बच्चों को बचपन से खेलों से जोड़ने की क्यों दी सलाह?
धोनी ने माता-पिता से बच्चों को कम उम्र से ही अलग-अलग खेलों में हिस्सा लेने के लिए प्रोत्साहित करने की अपील की। उनका मानना है कि बच्चों को विभिन्न गतिविधियों को आजमाने का अवसर मिलना चाहिए, ताकि वे अपनी रुचि और क्षमता को पहचान सकें। उन्होंने कहा, ‘हर कोई खिलाड़ी नहीं बनेगा, लेकिन जब आप 30-35 साल से अधिक उम्र के होंगे, तब आपको एहसास होगा कि जो लोग पहले खेल खेलते रहे हैं या फिटनेस से जुड़े रहे हैं, वे जीवन के मध्य चरण को बेहतर तरीके से जीते हैं।’
धोनी का कहना था कि खेलों का उद्देश्य हर बच्चे को पेशेवर खिलाड़ी बनाना नहीं है। इससे उनमें सक्रिय रहने की आदत विकसित होती है, जो आगे चलकर भी काम आती है। उम्र बढ़ने और पारिवारिक जिम्मेदारियां आने के साथ शारीरिक रूप से मजबूत बने रहना महत्वपूर्ण हो जाता है। अच्छी सेहत लोगों को अपने बच्चों के साथ खेलने और रोजमर्रा के पलों का आनंद लेने में भी मदद करती है।
best piece of advice for all age groups... school going kids, college students and working people. Dhoni doesn't speak much publicly, but when he does each word makes absolute sense 💯 https://t.co/EbR0WTBSsR
'24 घंटे में से एक घंटा खुद के लिए निकालें'
धोनी ने लोगों को रोजाना कम से कम एक घंटा शारीरिक गतिविधियों के लिए समर्पित करने की सलाह दी। उन्होंने कहा, ‘सबसे महत्वपूर्ण बात खुद में निवेश करना है। 24 घंटे में से एक घंटा अपने लिए निकालें।’ उन्होंने खेलों को शारीरिक फिटनेस से आगे बढ़कर जीवन के महत्वपूर्ण सबक सीखने का माध्यम भी बताया। उनके अनुसार, खेल लोगों को असफलता का सामना करना, जीत को सहजता से स्वीकार करना और अपनी कमियों को पहचानकर उन्हें दूर करने की कोशिश करना सिखाते हैं।
धोनी का संदेश है कि सेहत का ध्यान रखना केवल व्यक्तिगत जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसका असर हमारे आसपास के लोगों पर भी पड़ता है। उन्होंने लोगों से किसी ऐसे खेल या शारीरिक गतिविधि को चुनने की अपील की, जिसे वे नियमित रूप से कर सकें। जो लोग खुद के लिए समय निकालने को प्राथमिकता नहीं दे पाते, उन्हें अपने प्रियजनों के लिए ही सही, अपनी सेहत का ध्यान जरूर रखना चाहिए।