तीन अक्तूबर 2017 को छावनी परिषद ने संजय नारंग के भवन को तोड़ने की कार्रवाई शुरू की। करीब एक सप्ताह चली कार्रवाई के दौरान नारंग ने कोर्ट से तीन माह का स्टे ले लिया था। इसके बाद कैंट बोर्ड को कार्रवाई रोकनी पड़ी। हालांकि तब तक कैंट बोर्ड ने 45 फीसदी कोठी तोड़ चुकी थी।
संजय नारंग भवन के दूसरे हिस्से को बचाने के लिए हाईकोर्ट चले गए, हाईकोर्ट ने तीन माह का स्टे दिया था। छावनी परिषद ने हाईकोर्ट में अपना पक्ष रखा और 10 जनवरी 2018 को हाईकोर्ट ने संजय नारंग के स्टे को समाप्त कर छावनी परिषद के पक्ष में निर्णय दिया। इसके बाद फिर से ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू की गई।
शनिवार को मजिस्ट्रेट और पुलिस की मौजूदगी में ध्वस्तीकरण किया गया। नायब तहसीलदार दया राम ने बताया कि संजय नारंग के भवन को ध्वस्त करने के हाईकोर्ट की ओर से आदेश दिए गए है। इस मौके पर छावनी परिषद के मनोनीत सभासद कर्नल शुक्ला, कार्यालय अधीक्षक सीबी लखेड़ा समेत बड़ी संख्या में पुलिस बल मौजूद रहा।