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एनालिसिस: क्लीन स्वीप नहीं कर सकी टीम इंडिया, फिर भी श्रीलंका दौरे ने कैसे दिए भविष्य के लिए चार बड़े विकल्प?

Sat, 29 Aug 2026 10:31 AM IST
स्वप्निल शशांक अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली

सार

भारतीय टीम श्रीलंका दौरे पर टेस्ट सीरीज 2-0 से जीतने से चूक गई, लेकिन दौरे ने कई अहम सवालों के जवाब जरूर दिए। देवदत्त पडिक्कल, मानव सुथार, ध्रुव जुरेल और प्रसिद्ध कृष्णा ने भविष्य के लिए उम्मीद जगाई। हालांकि कोलंबो टेस्ट में जीत के करीब पहुंचकर चूकना टीम के लिए चिंता का विषय रहा।
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भारत बनाम श्रीलंका - फोटो : ANI
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विस्तार
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भारतीय क्रिकेट टीम जब श्रीलंका दौरे पर पहुंची थी तो कई सवाल खड़े थे। सबसे बड़ा सवाल नंबर-3 बल्लेबाज चुनने का था। पिछली कुछ सीरीज से उम्मीद जगाने वाले साई सुदर्शन चोटिल थे। वहीं रविचंद्रन अश्विन के संन्यास और रवींद्र जडेजा के करियर के अंतिम दौर में पहुंचने से अगले एक दशक के लिए टीम के लीड स्पिनर की तलाश भी चुनौती थी।

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सीरीज में भले ही भारत 2-0 से क्लीन स्वीप करने से चूक गया, लेकिन कई सवालों के जवाब जरूर मिले। भारतीय चयनकर्ता इस बात से खुश होंगे कि घरेलू मैदान पर न्यूजीलैंड और दक्षिण अफ्रीका के औसत स्पिनरों के सामने परेशानी में दिखने वाली टीम इंडिया ने श्रीलंकाई स्पिनरों का उन्हीं के घर में बेहतरीन तरीके से सामना किया।

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1. पडिक्कल भर सकते हैं नंबर-3 पर पुजारा की जगह
 

  • चेतेश्वर पुजारा के 2023 में संन्यास लेने के बाद से भारतीय टीम नंबर-3 पर उनके विकल्प की तलाश कर रही है। पुजारा के बाद इस स्थान पर आठ बल्लेबाजों को आजमाया गया है। श्रीलंका में देवदत्त पडिक्कल की सफलता ने कम से कम स्पिन गेंदबाजी के खिलाफ इस स्थान के लिए मजबूत विकल्प पेश किया है।
  • पडिक्कल ने दो टेस्ट की तीन पारियों में दो शतक के साथ 109.33 के औसत से 328 रन बनाए। खास बात यह रही कि उन्होंने स्पिनरों के खिलाफ बैकफुट पर जाकर चतुराई से बल्लेबाजी की और आगे बढ़कर गेंद को खेलने के कारण मिलने वाले स्पिन के प्रभाव को भी कम किया। यह प्रदर्शन उन्हें नंबर-3 के लिए लंबी दौड़ में शामिल करता है।


2. सुथार ने आगे बढ़कर संभाली गेंदबाजी की कमान
 

  • दौरे की दूसरी बड़ी सकारात्मक बात बाएं हाथ के स्पिनर मानव सुथार की सफलता रही। श्रीलंका में दो टेस्ट में 16 विकेट लेकर उन्होंने दिखाया कि वह परिस्थितियों के अनुसार अपनी गेंदबाजी में बदलाव कर सकते हैं।
  • गाले में पिच पर उछाल और टर्न मिलने के दौरान उन्होंने प्रभाव छोड़ा तो कोलंबो में पिच धीमी होने के बावजूद विकेट निकालने में सफल रहे।
  • रवींद्र जडेजा के करियर के अंतिम दौर और अश्विन के संन्यास के बाद भारतीय टीम को ऐसे स्पिनर की जरूरत है जो अलग-अलग परिस्थितियों में प्रभावी साबित हो सके। सुथार ने इस दौरे पर उस दिशा में मजबूत संकेत दिए हैं।


3. मध्यक्रम में जुरेल की सफलता से बढ़े विकल्प
 

  • मध्यक्रम में ध्रुव जुरेल ने भी टीम प्रबंधन को एक उपयोगी विकल्प दिया है। खराब पिच पर संयम के साथ पारी संभालने की उनकी क्षमता गाले टेस्ट में देखने को मिली, जहां उन्होंने 51 रन की महत्वपूर्ण पारी खेली।
  • दूसरे टेस्ट में 25 वर्षीय जुरेल ने शतक लगाकर अपनी बल्लेबाजी की क्षमता का एक और मजबूत प्रमाण दिया। खास बात यह रही कि उन्होंने स्पिन और तेज गेंदबाजी के खिलाफ समान आत्मविश्वास से बल्लेबाजी की।
  • ऐसे में जुरेल का प्रदर्शन भारतीय मध्यक्रम में विकल्पों की संख्या बढ़ाने वाला है।


4. प्रसिद्ध कृष्णा ने सपाट पिचों पर दिखाया दम
 

  • जसप्रीत बुमराह के लगातार चोटों से जूझने के कारण टेस्ट क्रिकेट में मोहम्मद सिराज का साथ देने वाले तेज गेंदबाज की तलाश भारतीय टीम के सामने लगातार बनी हुई है।
  • श्रीलंका की सपाट पिचों पर प्रसिद्ध कृष्णा ने अपनी गेंदबाजी से उम्मीद जगाई। उन्होंने समान गति और तीव्रता के साथ गेंदबाजी करते हुए परिस्थितियों से मदद नहीं मिलने के बावजूद दबाव बनाने की कोशिश की।
  • भारत के टेस्ट भविष्य के लिए तेज गेंदबाजी में विकल्प बढ़ाना बेहद जरूरी है और कृष्णा का यह प्रदर्शन टीम प्रबंधन के लिए सकारात्मक संकेत माना जा सकता है।


5. कोलंबो टेस्ट नहीं जीतने पर मंथन जरूरी
 

  • दौरे का सबसे बड़ा नकारात्मक पहलू कोलंबो टेस्ट में जीत के करीब पहुंचकर चूकना रहा। चौथे दिन फॉलोऑन खेल रही श्रीलंका को महज 16 रन की बढ़त पर 229 रन के स्कोर पर छह विकेट गंवाने के बावजूद भारतीय टीम पांचवें दिन जीत हासिल नहीं कर सकी।
  • इस मैच में टीम की रणनीति और जीत की भूख पर सवाल उठना स्वाभाविक है। कप्तान शुभमन गिल, उपकप्तान केएल राहुल, ऋषभ पंत और रवींद्र जडेजा जैसे अनुभवी खिलाड़ियों से ऐसे समय में विकेट लेने वाली रणनीति की उम्मीद थी, लेकिन टीम इसका फायदा नहीं उठा सकी।


कुल मिलाकर श्रीलंका दौरे ने भारतीय टीम की कुछ चिंताएं जरूर कम की हैं, लेकिन सभी सवालों के जवाब अभी नहीं मिले हैं। खासकर टेस्ट क्रिकेट में जीत को अंजाम तक पहुंचाने की क्षमता और तेज गेंदबाजी के विकल्पों को लेकर टीम को आगे भी काम करना होगा।

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