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16 साल में पहली बार!: वेस्टइंडीज ने भारत में जीते दो टी20 मैच, मिशन 2028 से पहले क्यों लग रहे झटके? चार कारण

Thu, 15 Oct 2026 02:11 PM IST
स्वप्निल शशांक स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

वेस्टइंडीज ने भारत के खिलाफ चौथे टी20 में 24 रन से जीत दर्ज कर पांच मैचों की सीरीज 2-2 से बराबर कर दी। भारतीय टीम की गेंदबाजी में नियंत्रण की कमी, परिस्थितियों के अनुरूप रणनीति न बदल पाना, मध्यक्रम का लड़खड़ाना और टीम चयन में संतुलन की चुनौती सामने आई है। 2028 टी20 विश्व कप और लॉस एंजिलिस ओलंपिक से पहले भारत को इन चार कमजोरियों पर काम करना होगा...
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भारतीय टीम का एनालिसिस - फोटो : Ani
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विस्तार
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भारत और वेस्टइंडीज के बीच पांच मैचों की टी20 सीरीज के चौथे मुकाबले में टीम इंडिया को 24 रन से हार झेलनी पड़ी। इसी के साथ सीरीज फिलहाल 2-2 की बराबरी पर है। इसका आखिरी और निर्णायक मुकाबला 17 अक्तूबर को बंगलूरू में खेला जाएगा। हालांकि, दो मैच जीतने के साथ ही वेस्टइंडीज ने एक खास उपलब्धि हासिल की है। 16 साल के भारत-वेस्टइंडीज टी20 इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है, जब कैरेबियाई टीम ने भारतीय सरजमीं पर पांच मैचों की द्विपक्षीय टी20 सीरीज में दो मुकाबले जीते हैं।

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भारतीय टीम - फोटो : ANI

भारत और वेस्टइंडीज के बीच 2011 में पहली बार द्विपक्षीय टी20 सीरीज का मुकाबला खेला गया था। तब से दोनों टीमों के बीच पांच मैचों की सीरीज सिर्फ तीन बार हुई है। इनमें दो बार वेस्टइंडीज के होम ग्राउंड पर सीरीज खेली गई, जबकि भारत में पहली बार पांच मैचों की सीरीज हो रही है। वेस्टइंडीज भारत के खिलाफ कितने भी मैचों की द्विपक्षीय सीरीज में भी सिर्फ एक बार दो या इससे ज्यादा मैच जीत पाया है। इस सीरीज से पहले ऐसा 2023 में हुआ था, जब वेस्टइंडीज ने अपनी मेजबानी में भारत को 3-2 से शिकस्त दी थी। 

भारत बनाम वेस्टइंडीज द्विपक्षीय टी20 सीरीज अब तक

कितने मैचों की सीरीज

मेजबान

साल

विजेता

सीरीज का अंतर

1

वेस्टइंडीज

2011

भारत

1-0

2

अमेरिका

2016

वेस्टइंडीज

0-1

1

वेस्टइंडीज

2017

वेस्टइंडीज

0-1

3

भारत

2018/19

भारत

3-0

3

अमेरिका

2019

भारत

3-0

3

भारत

2019/20

भारत

2-1

3

भारत

2021/22

भारत

3-0

5

अमेरिका/वेस्टइंडीज

2022

भारत

4-1

5

अमेरिका/वेस्टइंडीज

2023

वेस्टइंडीज

3-2

5*

भारत

2026

जारी

2-2*

* 2026 की पांच मैचों की टी20 सीरीज जारी है। 

ऐसे में 2028 टी20 विश्व कप की तैयारी कर रही भारतीय टीम के लिए यह सीरीज चेतावनी है। आखिर वे कौन से चार कारण हैं, जिनसे टीम इंडिया की कमजोरियां उजागर हुई हैं? आइए जानते हैं...

विकेट का जश्न मनाते कीमो पॉल - फोटो : ANI

1. गेंदबाजों का नियंत्रण गायब, बड़े स्कोर भी नहीं बचा पा रही टीम
भारतीय टीम के लिए सबसे बड़ी चिंता गेंदबाजी है। रांची में दूसरे टी20 में 249 रन का लक्ष्य देने के बावजूद भारत उसे बचा नहीं पाया था। वहीं, हैदराबाद में चौथे टी20 में भारतीय गेंदबाजों ने तीन विकेट पर 247 रन लुटा दिए। मयंक यादव ने 52 और अर्शदीप सिंह ने 52 रन दिए। दोनों ने 13 रन प्रति ओवर की दर से रन खर्च किए।

बुमराह की गैरमौजूदगी में भारतीय गेंदबाजी आक्रमण को अनुभव और सटीक रणनीति की कमी खल रही है। तेज गेंदबाज सही लेंथ पर लगातार गेंदबाजी नहीं कर पा रहे हैं, जबकि वेस्टइंडीज के बल्लेबाज इसका फायदा उठा रहे हैं। सूखी पिचों पर गेंदबाजों को परिस्थितियों के हिसाब से रणनीति बदलने की जरूरत है। ऐसे में सिर्फ तेज गति के भरोसे विपक्षी बल्लेबाजों को रोकना मुश्किल हो रहा है।

भारतीय टीम - फोटो : PTI

2. सपाट पिच और ओस पर निर्भरता, मुश्किल हालात में लड़खड़ा रही टीम
भारतीय टीम की दूसरी कमजोरी परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढालने में नजर आ रही है। बल्लेबाजी के अनुकूल पिचों पर बड़े स्कोर बनाना एक बात है, लेकिन लक्ष्य का पीछा करते समय दबाव संभालना और मध्य ओवरों में रन रोकना अलग चुनौती है। हैदराबाद में भारतीय टीम 248 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए 24 रन से हार गई। संजू सैमसन ने 56 रन बनाकर अच्छी शुरुआत दिलाई, लेकिन दूसरे बल्लेबाज इसे बड़ी साझेदारी में नहीं बदल सके। टीम को ऐसे हालात में वैकल्पिक रणनीति की जरूरत है, जहां पिच और ओस का फायदा पूरी तरह उसके पक्ष में न हो। 2028 टी20 विश्व कप को ध्यान में रखते हुए भारत को अलग-अलग परिस्थितियों में खेलने की तैयारी करनी होगी।

सुनील गावस्कर भारतीय बल्लेबाजों पर भड़के - फोटो : ANI

3. मध्यक्रम की अस्थिरता और गैर-जिम्मेदाराना शॉट, 76.92 फीसदी विकेट कैच से
भारत की तीसरी कमजोरी बल्लेबाजी में जोखिम लेने के तरीके से जुड़ी है। बड़े लक्ष्य का पीछा करते समय बल्लेबाजों का गैरजरूरी शॉट खेलकर विकेट गंवाना टीम पर दबाव बढ़ा रहा है। पूर्व कप्तान सुनील गावस्कर भी बल्लेबाजों से अधिक जिम्मेदारी लेने की अपील कर चुके हैं। इस सीरीज के दिए गए आंकड़ों के अनुसार, भारतीय बल्लेबाजों के आउट होने के 26 मामलों में से 16 कैच के जरिए आए। यानी कुल विकेटों में करीब 61.53 फीसदी कैच से गिरे। इसके अलावा चार बार बल्लेबाज बोल्ड हुए। वहीं, एल्बीडब्ल्यू, स्टंप और रन आउट के दो-दो मामले हैं।

आउट होने का तरीका

विकेट

कैच

16

एलबीडब्ल्यू

2

बोल्ड

4

रन आउट

2

स्टंप 2

कुल

26

ये आंकड़े बताते हैं कि हवाई शॉट खेलते समय बल्लेबाजों को ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है। हालांकि, सिर्फ आउट होने के तरीके से तकनीकी कमजोरी का अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। बेहतर शॉट चयन और साझेदारियां बनाना भारतीय टीम के लिए जरूरी होगा।

क्या बुमराह की कमी खल रही है? - फोटो : IANS
4. आठवें नंबर तक बल्लेबाज, लेकिन गेंदबाजी में संतुलन कहां?
भारतीय टीम की रणनीति में एक अतिरिक्त बल्लेबाज को शामिल कर बल्लेबाजी क्रम को आठवें नंबर तक मजबूत करने की कोशिश भी सवालों के घेरे में है। यदि इसके लिए विशेषज्ञ गेंदबाज की जगह बनाई जाती है, तो गेंदबाजी आक्रमण की धार प्रभावित हो सकती है। हैदराबाद में नीतीश कुमार रेड्डी ने तीन ओवर में 39 रन दिए। जब मुख्य गेंदबाज महंगे साबित होते हैं, तो ऑलराउंडरों पर दबाव बढ़ जाता है।

शाई होप जैसे फॉर्म में चल रहे बल्लेबाज इसका फायदा उठाते हैं। टीम प्रबंधन को तय करना होगा कि हर मैच में अतिरिक्त बल्लेबाज खिलाना ज्यादा जरूरी है या विशेषज्ञ गेंदबाजों के साथ आक्रमण को मजबूत करना। टी20 में बल्लेबाजी की गहराई अहम है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि गेंदबाजी के संतुलन से समझौता किया जाए।
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भारतीय टीम - फोटो : PTI
मिशन 2028 से पहले भारत के लिए चेतावनी
वेस्टइंडीज के खिलाफ सीरीज में भारत की गेंदबाजी, परिस्थितियों के अनुरूप रणनीति, बल्लेबाजी में जिम्मेदारी और टीम चयन का संतुलन चर्चा के केंद्र में है। सीरीज का 2-2 से बराबर होना बताता है कि कैरेबियाई टीम ने भारतीय कमजोरियों का फायदा उठाया है। टी20 विश्व कप 2028 और लॉस एंजिलिस ओलंपिक 2028 से पहले भारत के पास इन कमियों को दूर करने का समय है। सवाल सिर्फ सीरीज जीतने का नहीं, बल्कि ऐसी टीम तैयार करने का है जो अलग-अलग पिचों और दबाव वाली परिस्थितियों में भी अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर सके।
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