भारतीय क्रिकेट में पिछले कुछ समय से ऐसे खिलाड़ियों की तलाश जारी रही है जो तेज गेंदबाजी के साथ निचले क्रम में उपयोगी रन भी दे सकें। न्यूजीलैंड के खिलाफ पहले वनडे मैच में तेज गेंदबाज हर्षित राणा ने इसी दिशा में उम्मीद जगाई। गेंद और बल्ले दोनों से योगदान देने के बाद उन्होंने यह खुलासा किया कि टीम मैनेजमेंट उन्हें एक विशेषज्ञ वनडे ऑलराउंड ऑप्शन के रूप में तैयार कर रहा है।
टीम की प्लानिंग: नंबर सात-आठ की भूमिका
मैच के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में राणा ने साफ किया कि टीम की भूमिका उन्हें पूरी स्पष्टता से समझाई गई है। उन्होंने अपने बयान में कहा, 'टीम मैनेजमेंट मुझे एक ऑलराउंडर के तौर पर ग्रूम करना चाहता है, और मेरा काम उसी पर मेहनत करना है। मैं इस पर काम कर रहा हूं, नेट्स में भी। बल्लेबाजी में नंबर आठ पर खेलना होगा और टीम चाहती है कि वहां रन निकले।' उन्होंने आगे जोड़ा, 'जब मैं बैटिंग के लिए गया, तो साथियों ने जो आत्मविश्वास दिया, वही काम आया। मैं बस उसी पर फोकस गया और रन बना पाया।'
बड़ोदा थ्रिलर में राणा का कमाल
न्यूजीलैंड के खिलाफ चेज के दौरान विराट कोहली और श्रेयस अय्यर की साझेदारी के बाद अचानक विकेट गिरे और तनाव बढ़ा। इसी बीच वॉशिंगटन सुंदर की हल्की चोट के कारण राणा को नंबर सात पर भेजा गया।
परिणाम शानदार रहा। उन्होंने गेंद से भी कमाल दिखाया था और कीवियों को दो शुरुआती झटके दिए थे। हर्षित ने डेवोन कॉनवे और हेनरी निकोल्स को आउट किया था। इसके बाद बल्ले से कमाल दिखाते हुए हर्षित ने 23 गेंद में दो चौके और एक छक्के की मदद से 29 रन की पारी खेली थी। इसने केएल राहुल पर दबाव कम किया और भारत ने मुकाबला जीत लिया।
गंभीर का भरोसा और पहले के संकेत
यह पहली बार नहीं था जब राणा की बल्लेबाजी को भरोसा मिला। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मेलबर्न टी20 में भारत 49/5 पर था, तब उन्हें नंबर सात पर भेजा गया और उन्होंने 35(33) रन बनाकर मैच संभाला। इससे साफ है कि कोच गौतम गंभीर पहले ही उनकी बल्लेबाजी क्षमता पहचान चुके हैं। राणा ने इस भरोसे को लेकर कहा, 'मुझे लगता है कि मैं नंबर सात पर टीम के लिए 30-40 रन बना सकता हूं, और टीम भी यही विश्वास रखती है। जब ऐसा वातावरण बनता है तो चीजें मैदान पर होने लगती हैं।'