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Harbhajan Singh: क्या टी20 ने बल्लेबाजों का धैर्य छीन लिया? हरभजन ने बताया- तिहरे शतक की संख्या क्यों कम हुई?

Fri, 14 Aug 2026 04:16 PM IST
स्वप्निल शशांक स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

पूर्व भारतीय स्पिनर हरभजन सिंह का मानना है कि टी20 क्रिकेट के बढ़ते प्रभाव ने आधुनिक बल्लेबाजों की आक्रामकता बढ़ाई है, लेकिन धैर्य कम किया है। उन्होंने टेस्ट क्रिकेट में 250-300 रन की लंबी पारियों और तिहरे शतकों के घटते चलन पर चिंता जताई। हरभजन ने आईपीएल के बढ़ते प्रभाव को भी इसका एक कारण बताया।
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हरभजन सिंह - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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क्रिकेट के छोटे प्रारूपों के बढ़ते प्रभाव ने बल्लेबाजी के तरीके में बड़ा बदलाव किया है। पूर्व भारतीय दिग्गज स्पिनर हरभजन सिंह का मानना है कि टी20 क्रिकेट ने बल्लेबाजों को ज्यादा आक्रामक तो बनाया है, लेकिन इसकी कीमत उन्हें अपने धैर्य से चुकानी पड़ी है। यही वजह है कि टेस्ट क्रिकेट में अब पहले जैसी लंबी और विशाल पारियां कम देखने को मिलती हैं।
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हरभजन ने न्यूज एजेंसी पीटीआई को दिए इंटरव्यू में कहा, 'टी20 के इस दौर में मौजूदा पीढ़ी के बल्लेबाजों में पहले के बल्लेबाजों जैसा धैर्य नहीं है। बहुत कम बल्लेबाज ऐसे हैं जो टिककर खेल सकें और एक पारी में 250 या 300 रन बना सकें, क्योंकि अगर आप इतने ज्यादा शॉट खेलेंगे तो आउट होने का खतरा हमेशा रहेगा। आजकल टेस्ट में किसी बल्लेबाज को तिहरा शतक बनाते हुए बहुत ही कम देखा जाता है।'

लारा, सहवाग और गेल जैसे बल्लेबाजों को किया याद
हरभजन ने पिछली पीढ़ी के उन बल्लेबाजों का उदाहरण दिया, जिन्होंने आक्रामक क्रिकेट खेलने के बावजूद टेस्ट में बड़ी-बड़ी पारियां खेलीं। ब्रायन लारा ने टेस्ट में 400 रन की पारी खेली, जबकि वीरेंद्र सहवाग, क्रिस गेल और मैथ्यू हेडन जैसे बल्लेबाजों ने भी तिहरे शतक लगाए। उन्होंने कहा, 'पहले ब्रायन लारा थे, फिर क्रिस गेल, वीरेंद्र सहवाग और मैथ्यू हेडन, इन सभी ने तिहरे शतक लगाए। लारा ने 400 रन बनाए। एबी डिविलियर्स और जाक कैलिस भी थे, जिन्होंने बड़े दोहरे शतक लगाए।' टेस्ट क्रिकेट में हाल के वर्षों में पाकिस्तान के अजहर अली, ऑस्ट्रेलिया के डेविड वार्नर, इंग्लैंड के हैरी ब्रूक और दक्षिण अफ्रीका के वियान मुल्डर ने तिहरे शतक लगाए हैं, लेकिन इस तरह की पारियां अब पहले की तुलना में काफी कम हो गई हैं।
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ऑस्ट्रेलिया ने बदली थी टेस्ट क्रिकेट की रफ्तार
भारत के लिए 1998 में अंतरराष्ट्रीय पदार्पण करने वाले हरभजन ने 2000 के दशक की शुरुआत के ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट को याद करते हुए कहा कि उस समय कंगारू टीम बाकी टीमों से काफी आगे थी। उन्होंने कहा, 'अगर मैं 2001 से देखूं तो ऑस्ट्रेलिया एकमात्र ऐसी टीम थी जो टेस्ट में तेजी से रन बनाती थी और अपने समय से आगे थी। बाकी टीमें सामान्य क्रिकेट खेलती थीं और एक दिन में 250 रन बनाती थीं, जबकि ऑस्ट्रेलिया हर बार एक दिन में 350 रन बनाने के बारे में सोचता था। उनका दबदबा था।' हरभजन के मुताबिक इसके बाद टेस्ट क्रिकेट की रफ्तार लगातार बढ़ती गई। इसका असर गेंदबाजों पर भी पड़ा और स्पिनरों को आक्रामक बल्लेबाजों के खिलाफ अपनी रणनीति बदलनी पड़ी।

आक्रामक बल्लेबाजों के खिलाफ बदलनी होगी रणनीति
हरभजन ने कहा कि आधुनिक बल्लेबाजों के खिलाफ गेंदबाजों को सिर्फ बचाव की मानसिकता के साथ गेंदबाजी नहीं करनी चाहिए। उन्हें लगातार दबाव बनाकर बल्लेबाज को उसके पसंदीदा शॉट खेलने से रोकना होगा। उन्होंने कहा, 'आपको अलग योजना और अलग मानसिकता के साथ आना होगा। आपको लगातार डॉट गेंदें डालकर दबाव बनाना होगा और बल्लेबाज को अलग तरह का शॉट खेलने के लिए मजबूर करने की कोशिश करनी होगी।' उन्होंने इंग्लैंड के 'बैजबॉल' अंदाज का उदाहरण देते हुए कहा कि अब टीमें तेजी से रन बनाने के लिए बड़े जोखिम उठाने से भी नहीं डरतीं।

हरभजन ने कहा, '2001 से अब तक टेस्ट क्रिकेट में टीमों के खेलने के तरीके में पूरी तरह बदलाव आया है। अगर आप देखें कि इंग्लैंड टेस्ट कैसे खेलता है, तो वह एक दिन में 500 रन बनाने की कोशिश करता है और इसी कोशिश में 70 या 80 रन पर भी ऑल आउट हो सकता है।'

आईपीएल ने युवाओं के लिए बदला सफलता का रास्ता
हरभजन का मानना है कि आईपीएल ने भी युवा खिलाड़ियों के क्रिकेट करियर की दिशा बदलने में बड़ी भूमिका निभाई है। टी20 लीग खिलाड़ियों को कम समय में पहचान और आर्थिक सफलता दिला देती है, जिससे लाल गेंद के क्रिकेट पर ध्यान कुछ हद तक कम हुआ है। उन्होंने कहा, 'मेरा मानना है कि लाल गेंद से सफेद गेंद क्रिकेट की ओर ध्यान थोड़ा खिसका है। इसका कारण यह है कि आईपीएल एक बहुत बड़ा मंच है, जो खिलाड़ी को पहचान के साथ-साथ बड़ी रकम भी दिलाता है। आप रातोंरात स्टार बन जाते हैं और इससे पहले कि आपको पता चले, आप भारत के लिए खेल रहे होते हैं।' उन्होंने पुराने दौर का उदाहरण देते हुए कहा कि पहले कई खिलाड़ियों को भारतीय टीम में जगह बनाने के लिए वर्षों तक इंतजार करना पड़ता था।

हरभजन ने कहा, 'पहले के समय में लोग भारत के लिए खेलने के लिए 10 साल तक भी मेहनत करते थे। अमोल मजूमदार और अमरजीत केपी जैसे कई खिलाड़ी थे, जिन्होंने काफी रन बनाए लेकिन भारत के लिए नहीं खेल सके क्योंकि सीनियर टीम में जगह नहीं थी। लेकिन अब तीन प्रारूप हैं, इसलिए भारत के लिए खेलने के ज्यादा मौके हैं।'

पांचवें दिन तक नतीजा पता नहीं चलता था
क्रिकेट में आई तेजी को स्वीकार करने के बावजूद हरभजन को टेस्ट क्रिकेट का पुराना रोमांच याद आता है। उनके मुताबिक पहले टेस्ट मैच में पांचवें दिन तक नतीजे को लेकर अनिश्चितता बनी रहती थी और यही इस प्रारूप की सबसे बड़ी खूबसूरती थी। उन्होंने कहा, 'मेरा मानना है कि टेस्ट क्रिकेट का आकर्षण उस दौर में था जब हम खेलते थे। मैच पांच दिन तक चलता था और पांचवें दिन तक यह पता नहीं होता था कि कौन सी टीम जीतेगी।'
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