क्या है पूरा मामला?
दरअसल, विश्व कप जीतने के बाद सूर्यकुमार और कोच गौतम गंभीर ने मंदिर जाकर पूजा अर्चना की। गौतम गंभीर और कप्तान सूर्यकुमार के साथ आईसीसी अध्यक्ष जय शाह भी दिखे। तीनों ने मंदिर में जाकर पूजा-अर्चना की और भगवान हनुमान के समक्ष ट्रॉफी रखकर आशीर्वाद लिया। मंदिर परिसर में मौजूद लोगों ने भी खिलाड़ियों का गर्मजोशी से तीनों का स्वागत किया और टीम इंडिया के समर्थन में नारे लगाए। तीनों ने भगवान हनुमान के चरणों में माथा टेककर देश की सफलता और टीम के उज्ज्वल भविष्य के लिए प्रार्थना की।
इसके बाद ट्रॉफी के मंदिर ले जाने को लेकर कीर्ति आजाद ने सोशल मीडिया पर सवाल उठाए। उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा कि 1983 में जब भारत ने कपिल देव की कप्तानी में विश्व कप जीता था, तब टीम में हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई सभी धर्मों के खिलाड़ी थे और उस जीत को भारत माता को समर्पित किया गया था। उन्होंने सवाल किया कि क्रिकेट ट्रॉफी को किसी एक धार्मिक स्थल पर क्यों ले जाया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि ट्रॉफी 1.4 अरब भारतीयों की है, किसी एक धर्म की जीत का प्रतीक नहीं।
हरभजन सिंह ने भी जताई नाराजगी
कीर्ति आजाद के बयान पर पूर्व भारतीय स्पिनर हरभजन सिंह ने भी हैरानी जताई। उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों के मंदिर जाने को लेकर राजनीति करना ठीक नहीं है। हरभजन ने कहा, 'यह अजीब बात है कि कोई खिलाड़ी ट्रॉफी मंदिर ले जाए और उस पर राजनीति होने लगे। कीर्ति खुद क्रिकेटर रह चुके हैं, इसलिए उनसे ऐसी उम्मीद नहीं थी।'