भारतीय क्रिकेट के दिग्गज बल्लेबाज रोहित शर्मा आज 38 साल की उम्र में भी शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन उनके करियर का एक बड़ा अफसोस 2011 वनडे वर्ल्ड कप से बाहर रहना रहा। उस टूर्नामेंट में एमएस धोनी की कप्तानी में भारत ने श्रीलंका को हराकर 28 साल बाद खिताब जीता था।
पूर्व चयनकर्ता ने मांगी माफी
भारत के पूर्व चयनकर्ता कृष्णमाचारी श्रीकांत (क्रिस श्रीकांत) ने अब इस फैसले पर अफसोस जताया है। क्रिकेट पंडित अयाज मेमन से बातचीत के दौरान उन्होंने रोहित से माफी मांगने की बात स्वीकार की। उन्होंने कहा, 'मुझे आज भी उसके लिए बुरा लगता है। मैंने रोहित से पिछले साल कहा था- मैं माफी चाहता हूं, बॉस। यह जानबूझकर नहीं किया गया था, लेकिन हम कुछ ऐसे खिलाड़ियों को लेना चाहते थे जो आधे ऑलराउंडर हों। हमारी सोच 1983 वर्ल्ड कप जैसी थी। आखिर में प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट कौन था? युवराज सिंह। बैट और बॉल दोनों से उसने शानदार प्रदर्शन किया।'
'हाफ ऑलराउंडर' कॉन्सेप्ट ने छीना मौका
श्रीकांत ने बताया कि उस समय टीम संयोजन में ऐसे खिलाड़ियों को प्राथमिकता दी गई जो बल्लेबाजी के साथ गेंदबाजी में भी योगदान दे सकें। उन्होंने कहा, 'हमारे पास वीरेंद्र सहवाग, सचिन तेंदुलकर, सुरेश रैना और यूसुफ पठान थे, जो कुछ ओवर डाल सकते थे। हरभजन के बैकअप के तौर पर अश्विन भी थे। यूसुफ पठान भी एक तरह के हाफ ऑलराउंडर थे। इसी सोच के चलते रोहित के लिए टीम में जगह नहीं बन पाई। वह 2011 वर्ल्ड कप खेलने के लिए पर्याप्त अच्छे थे, लेकिन दुर्भाग्य से वह मौका चूक गए।'
युवराज सिंह की सलाह ने बदली दिशा
तब 23 साल के रोहित को टीम से बाहर किए जाने की खबर मिली, तो यह उनके लिए बड़ा झटका था। उन्होंने बाद में इसे अपने करियर का टर्निंग पॉइंट बताया। उस मुश्किल दौर में युवराज सिंह ने रोहित का हौसला बढ़ाया। रोहित ने याद करते हुए बताया कि युवराज ने उन्हें अपनी कमजोरियों पर काम करने की सलाह दी और भरोसा दिलाया कि उनका क्रिकेट करियर लंबा है। यह सलाह आगे चलकर रोहित के करियर में काफी अहम साबित हुई और उन्होंने खुद को दुनिया के सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाजों में शामिल किया।