क्रिकेट में पिता-पुत्र के देश के लिए खेलने के उदाहरण कई मिलेंगे, लेकिन क्रिकेट के साथ चेस जैसे खेल में देश के प्रतिनिधत्व का कारनामा किसी ने नहीं किया है।
इतिहास की यह नई इबारत भी लिखी जानी वाली है और इस उपलब्धि का सेहरा क्रिकेट की पिच पर अपनी फिरकी से शतरंजी जाल बुनने वाले जींद (हरियाणा) के गुगली लेग स्पिनर गेंदबाज युजवेंदर चहल के सिर बंधने जा रहा है।
जिंबाबे दौरे के लिए रविवार को भारतीय टीम में चुने गए चहल चेस के नेशनल चैंपियन भी रह चुके हैं जूनियर वर्ल्ड कप में देश का प्रतिनिधत्व भी कर चुके हैं। चहल का पहला प्यार तो क्रिकेट ही रहा, लेकिन वकील पिता यही चाहते थे कि बेटा चेस खेले।
जब बारी दोनों में से एक को चुनने की आई तो बेटे ने क्रिकेट को चुना, लेकिन पिता ने कहा देश के लिए एक बार चेस खेल ले फिर छोड़ देना। युजवेंदर ने पिता की इस ख्वाहिश को तो पूरा दिया और अब वह माता-पिता की दूसरी इच्छा यानि की क्रिकेट में देश के प्रतिनिधत्व को भी पूरा करने जा रहे हैं।