इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के इस चरण के दौरान सभी आठ टीमों में 73 अनकैप्ड भारतीय घरेलू खलाड़ी जुड़े थे, जिसमें बासिल थम्पी और दीपक हुड्डा भी शामिल थे जो भारतीय टीम का हिस्सा रह चुके हैं। इन खिलाड़ियों का अनुबंध 20 लाख रुपये से लेकर करीब 10 करोड़ रुपये (कृष्णप्पा गौतम) तक था। हालांकि 700 के करीब खिलाड़ियों के पास आईपीएल अनुबंध नहीं है और वे पूरे घरेलू सत्र में 10 लाख रुपये से 20 लाख रुपये तक कमाई करते हैं, जिसमें से ज्यादातर राशि रणजी ट्रॉफी से आती है, जिसमें उन्हें एक मैच के लिये 1.40 लाख रुपये की फीस मिलती है।
बीसीसीआई के एक पूर्व और राज्य इकाई के अनुभवी अधिकारी ने कहा, 'कोषाध्यक्ष सही हैं। बीसीसीआई अध्यक्ष सौरव गांगुली ने मुआवजे की घोषणा की थी लेकिन यह कैसे निर्धारित करोगे कि कौन सा खिलाड़ी सत्र में आठ या 10 मैच खेलता? रिजर्व खिलाड़ियों को आधी राशि मिलेगी तो आप इसकी गणना कैसे करोगे?' उन्होंने कहा, 'आप प्रत्येक खिलाड़ी को एक समान राशि नहीं दे सकते। राज्यों को एकमुश्त राशि देना एक विकल्प है लेकिन आप राज्यों पर निगरानी कैसे रखोगे?'
कोविड-19 महामारी और इसके चलते बंद हुए बीसीसीआई मुख्यालय से यह विलंब हुआ लेकिन ज्यादातर घरेलू खिलाड़ियों को पिछले कुछ सत्र से सकल राजस्व हिस्सेदारी (जीआरएस) नहीं मिली है। बीसीसीआई हमेशा अपने टीवी प्रसारण राजस्व से घरेलू क्रिकेटरों को कुछ हिस्सा देता है और यह सामान्य तौर पर सितंबर में सालाना खातों के निपटारे के बाद मिल जाता है। धूमल के अनुसार, घरेलू खिलाड़ियों का जीआरएस 2016-17 सत्र के बाद से लंबित है।