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यादें: यशपाल ने शरीर पर खूब झेली मार्शल के प्यार की निशानी

Wed, 14 Jul 2021 01:37 PM IST
ओम. प्रकाश स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

यशपाल शर्मा ने अपने क्रिकेट करियर के दौरान वेस्टइंडीज के तूफानी गेंदबाज मैल्कम मार्शन का डटकर सामना किया। कई बार मार्शल की गेंदें उनकी पसलियों पर लगीं लेकिन उन्होने इसकी जरा भी परवाह नहीं की। 
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यशपाल शर्मा - फोटो : Social Media
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विस्तार
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भारतीय टीम के 1983 विश्व कप जीत में मध्यक्रम के बल्लेबाज यशपाल का भी बड़ा योगदान रहा हालांकि वह उतना चर्चा में नहीं रहा जितना कप्तान कपिल, मोहिंदर अमरनाथ, रोजर बिन्नी का रहा। वेस्टइंडीज के खिलाफ पहले ही मैच में उन्होंने लंबे कद के तेज गेंदबाजों का बखूबी सामना किया और भारत को जीत से शुरूआत दिलाने में योगदान दिया। साथियों में यश पाजी के नाम से मशहूर यशपाल शर्मा मंगलवार सुबह दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया।  शर्मा भारतीय टीम के चयनकर्ता भी रहे। महिला क्रिकेट में कई वनडे मैचों में अंपायरिंग की भूमिका भी निभाई। उनके परिवार में पत्नी के अलावा दो बेटियां और एक बेटा है। वह सुबह की सैर से लौटने के बाद घर पर गिर गए। उनका लोदी रोड स्थित श्मशानघाट पर अंतिम संस्कार किया गया। 

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उन्होंने वेस्टइंडीज के तेज गेंदबाजों के बाउंसर भी झेले और 145 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से आने वाली इनस्विंगर का भी सामना किया। वो साथियों से जिक्र खुद कहा करते थे कि वेस्टइंडीज के तेज गेंदबाज मैल्कम मार्शल का तो मुझसे खास ही रिश्ता है। मुझे दो बार गेंद मारेगा जरूर। एक मर्तबा जब उन्होंने 1983 में सबीना पार्क टेस्ट में 60 रन की ठोस पारी खेली तो ड्रेसिंग रूम में टी शर्ट उतारकर शरीर पर झेली शॉर्टपिच गेंदों को दिखाते हुए कहा था, ये देखो मार्शल के प्यार की निशानी। 

यशपाल के पास गावस्कर जैसा स्तर, वेंगसरकर जैसी लय और गुंडप्पा विश्वनाथ जैसा विशिष्टता नहीं थी लेकिन उन्होंने उस टीम में मध्यक्रम में अपनी खास जगह बनाई। विश्व कप में विंडीज के खिलाफ अहम पारी: मध्यक्रम के इस बल्लेबाज ने 1983 के विश्व कप में 34.28 के औसत से 240 रन बनाए। पहले मैच में वेस्टइंडीज के खिलाफ जीत दिलाने में उनकी अहम भूमिका निभाई। दाएं हाथ के बल्लेबाज ने 120 गेंद पर 89 रन की पारी खेली। इसके अलावा ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 40 रन और इंग्लैंड के खिलाफ 61 रन बनाए।
 

कपिल नहीं रोक पाए आंसू  

पूर्व क्रिकेटर और 1983 विश्व कप जीत के साथी यशपाल शर्मा के निधन पर पूर्व कप्तान कपिल देव अपने आंसू नहीं रोक पाए। एक टीवी चैनल पर बात करते हुए कपिल रोने लगे। कुछ हफ्ते पहले 1983 विश्व कप के सदस्य एक किताब के विमोचन पर एक साथ एकत्रित भी हुए। मध्यक्रम के इस बल्लेबाज का 

7वें मैच में पहला शतक   
 
दो अगस्त 1979 का टेस्ट पदार्पण करने वाले यशपाल शर्मा ने टेस्ट क्रिकेट में अपना पहला शतक दो महीने के अंदर जड़ दिया था। उन्होंने अपने सातवें मैच में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ दिल्ली में ड्रॉ रहे मैच में नाबाद 100 रन की पारी खेली थी। दूसरा शतक इंग्लैंड के खिलाफ जनवरी 1982 में लगाया। दिल्ली में 1979 में पाकिस्तान के खिलाफ टेस्ट में वेंगसरकर (140) और यशपाल (60) की साझेदारी से भारत ने मैच बचाया था। इसके अलावा 1979 में कोलकाता में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ उनके नाबाद 85 रन और 1980 में कोलकाता में ही पाकिस्तान के खिलाफ पहली पारी में उनके 62 रन भी अहम रहे थे। 

तीन राज्यों की नुमाइंदगी  

सत्तर के दशक में पंजाब के सुपरस्टार यशपाल ने घरेलू क्रिकेट में तीन राज्यों पंजाब, हरियाणा और रेलवे का प्रतिनिधित्व किया। उन्होंने 160 मैचों में 8933 रन बनाए जिसमें 21 शतक थे और 201 उनका सर्वाधिक स्कोर था। वह अंपायर भी रहे और कई महिला क्रिकेट वनडे में उन्होंने यह दायित्व भी संभाला। 

दिलीप कुमार के थे फैन

यशपाल शर्मा दिलीप कुमार के बहुत बड़े फैन थे। दिलीप कुमार ने पंजाब का रणजी मैच देखने के बाद शर्मा के लिए बीसीसीआई में राजसिंह डुंगरपुर से बात की थी। यशपाल  इस बात के लिए दिलीप कुमार का बड़ा आभार मानते थे।

उनके निधन पर दुख व्यक्त करते हुए पूर्व कप्तान दिलीप वेंगसरकर ने कहा, यह अविश्वसनीय है। वह हम सब में सबसे ज्यादा फिट दिखते थे। मैंने तो उनसे पूछा था उनकी दिनचर्या क्या रहती है। एकदम शाकाहारी और डिनर में सूप ही लेता था। सुबह की सैर को लेकर भी पाबंद रहता था। मैं तो स्तब्ध हूं। भारत को पहला विश्व कप जिताने वाले कपिल देव ने अपने शोक संदेश में कहा, पिछले हफ्ते ही हम मिले थे। वो अच्छे स्वभाव में थे। भगवान की मर्जी के साथ हम लड़ नहीं सकते। बहुत अजीब लग रहा है। उनके निधन की खबर के बाद मैं अपने आपको ही नहीं संभाल पा रहा हूं। 

विश्व कप जीतने वाली टीम में शामिल रहे कीर्ति आजाद यशपाल शर्मा को याद करते हुए कहा, हाल में जब मुलाकात हुई थी तो उन्होंने कहा था कि कुछ वजन घट गया है। हमारी अच्छी छनती थी। विश्व कप में पहले मैच में उन्होंने विंडीज के तेज गेंदबाजों के खिलाफ शानदार बल्लेबाजी की थी। अब लोग जडेजा को रनआउट करते देखते हैं तब यशपाल का निशाना अचूक था। वह हर बार स्टंप को हिट करते थे। 
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बीसीआई अध्यक्ष सौरव गांगुली ने भी उनके निधन पर गहरा दुख प्रकट किया। उन्होंने अपने शोक संदेश में कहा, यशपाल शर्मा के निधन से मुझे गहरा दुख हुआ है। हमने अपने एक क्रिकेट नायक को खो दिया है। वह मध्यक्रम के उपयोगी बल्लेबाज के साथ शानदार क्षेत्ररक्षक और मैदान के बाहर एक मिलनसार व्यक्ति थे। वहीं बीसीसीआई सचिव ने जय शाह ने कहा, यशपाल शर्मा को भारत के 1983 विश्व कप चैंपियन बनने के अभियान के दौरान बल्लेबाजी में उनके योगदान के लिए याद किया जाएगा। 
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