1979 विश्व विजेता वेस्टइंडीज टीम
खिताबी मुकाबले में भले ही विव रिचर्ड्स (138) ने नाबाद शतकीय पारी खेली हो, लेकिन विंडीज को लगातार दूसरी बार किंग बनाने का काम बल्लेबाज कोलिंस किंग ने किया। उनकी 66 गेंदों पर खेली गई 86 रन की ताबड़तोड़ पारी ने मैच का रुख बदल दिया था। विंडीज ने एक समय 99 रन पर शीर्ष चार बल्लेबाज गंवा दिए थे। किंग ने रिचर्ड्स के साथ पांचवें विकेट के लिए 139 रन की साझेदारी कर स्कोर 250 के करीब पहुंचाया था। रिचर्ड्स ने किंग से आराम से बल्लेबाजी करने को कहा था, पर किंग ने उनसे कहा, पूरे टूर्नामेंट में हमने किसी को नहीं बख्शा, तो फिर आज अलग क्यों? मैं जेफ्री को यह ट्रॉफी यूं ही नहीं ले जाने दूंगा।
विश्वनाथ ही चले: भारतीय टीम अपने पहले ही मुकाबले में 53.1 ओवर में सिर्फ 190 रन पर ढेर हो गई। गुंडप्पा विश्वनाथ (75) को छोड़कर कोई भी खिलाड़ी 20 का आंकड़ा पार नहीं कर सका। माइकल होल्डिंग ने चार विकेट झटके। जवाब में विंडीज ने गॉर्डन ग्रीनिज (106) की नाबाद शतकीय पारी से एक विकेट पर 194 रन बनाकर नौ विकेट से मैच जीत लिया।
182 पर ढेर: न्यूजीलैंड की चौकड़ी लांस केन्यर्स (3/36), ब्रायन मैक्केशिने (3/24), रिचर्ड हेडली (2/20) और गैरी ट्रूप (2/36) के आगे भारतीय टीम 55.5 ओवर में 182 पर लुढ़क गई। सुनील गावस्कर ने सर्वाधिक 55 और ब्रजेश पटेल ने 38 रन बनाए। न्यूजीलैंड ने लक्ष्य को ब्रूस एडगर नाबाद 84 और जीएम टर्नर नाबाद 43 की मदद से 57 ओवर में दो विकेट खोकर पा लिया।
40 से पार नहीं गया कोई: भारतीय टीम श्रीलंका से भी हार गई। श्रीलंका को तक टेस्ट दर्जा नहीं मिला था। श्रीलंका से मिले 239 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए भारतीय टीम 54.1 ओवर में 191 रन पर ढेर हो गई। उसका कोई भी बल्लेबाज चालीस के पार नहीं जा सका। दिलीप वेंगसकर ने 36, गायवाड़ ने 33 और गावस्कर ने 26 रन बनाए।
नए खिलाड़ी
कपिल देव, सुरेंद्र खन्ना, दिलीप वेंगसरकर