विश्व कप 2019 का काउंट डाउन शुरू हो चुका है। हर चार साल में होने वाले 'क्रिकेट के महाकुंभ' की मेजबानी इस बार इंग्लैंड-वेल्स कर रहा है। पहला विश्व कप 1975 में खेला गया। विजेता रही वेस्टइंडीज की टीम, जिसने ऑस्ट्रेलिया को फाइनल में मात दी। 1979 में हुए दूसरे विश्व कप में भी कैरेबियाई टीम का कब्जा रहा। इस बार इंग्लैंड को मुंह की खानी पड़ी।
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विश्व कप 1983
जानलेवा तेज गेंदबाजों और जबरदस्त बल्लेबाजों से भरी इस टीम की कप्तानी महान बल्लेबाज क्लाइव लॉयड कर रहे थे। हर कोई यह मान बैठा था कि वेस्टइंडीज वर्ल्ड कप विक्ट्री की हैट्रिक बनाएगा, क्योंकि सामने अपेक्षाकृत कमजोर भारतीय टीम थी। मगर 25 जून 1983 का वो हुआ जिसने भारतीय क्रिकेट की दशा-दिशा बदल दी।
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विश्व कप 1983
टीम इंडिया ने सभी को चौंकाते हुए न सिर्फ 183 रन का स्कोर बचाया बल्कि धुरंधरों से सजी वेस्टइंडीज को 140 रन में समेट दिया। किसी ने सपने में भी नहीं सोचा था कि कपिल देव की अगुवाई वाली यह टीम लगातार 2 विश्व कप जीत चुकी खूंखार वेस्टइंडीज को हरा पाएगी।
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विश्व कप 1983
183 का स्कोर बचाने उतरी भारतीय टीम के कप्तान कपिल देव ने ड्रेसिंग रूम में अपने खिलाड़ियों में वो जोश भरा कि क्लाइव लॉयड, विवियन रिचर्ड्स, डेसमंड हेन्स जैसे दिग्गज बल्लेबाजों से लैस वेस्टइंडीज की टीम के 7 खिलाड़ी दहाई के आंकड़े तक नहीं पहुंच सके थे।
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विश्व कप 1983
उस ऐतिहासिक जीत के बाद टीम इंडिया ने अपने ड्रेसिंग रूम में जमकर जश्न मनाया था, चलिए आपसे भी उससे जुड़ी कुछ मजेदार यादों को शेयर करते हैं। उस विश्व विजेता टीम के सदस्य और तेज गेंदबाज रहे मदन लाल ने खुद बताया था कि कैसे पूरी टीम ने शैंपेन से उस रात जश्न मनाया था।
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मदन लाल 1983 विश्व कप विजेता टीम के सदस्य
बकौल मदन लाल, 'कपिल वर्ल्ड कप फाइनल जीतने के बाद वेस्टइंडीज के ड्रेसिंग रूम में सभी खिलाड़ियों से हाथ मिलाने पहुंचे। उस कमरे में सन्नाटा पसरा हुआ था। उन्हें वहां शैम्पेन की बोतलें दिखाई दे रही थीं। भारत को 183 में समेटने के बाद वेस्टइंडीज ने अपनी जीत सुनिश्चित मानते हुए ढेर सारी शैम्पेन मंगवा ली थी। जो उनकी हार के बाद किसी काम की नहीं थी।
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विश्व कप 1983
कपिल देव ने लॉयड से पूछा, 'क्या मैं शैम्पेन की कुछ बोतलें ले जा सकता हूं? हमने एक भी नहीं मंगवाई है'। क्लाइव ने कपिल को इशारा भर किया और जाकर एक कोने में बैठ गए। कपिल और मोहिंदर अमरनाथ ने बोतलें उठाईं और टीम इंडिया ने पूरी रात जश्न मनाया।
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विश्व कप 1983
जश्न में डूबे भारतीय खिलाड़ियों को हालांकि उस रात खाना नसीब नहीं हुआ था। दरअसल, किचन रात 9 बजे बंद हो जाते थे। जश्न मनाने के बाद जब भारतीय टीम होटल पहुंची, तो खाना खत्म हो चुका था, फिर टीम को भूखे ही सोना पड़ा।
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कपिल देव
- फोटो : self
उस रात के बाद भारतीय क्रिकेट का सूरज उदयमान हुआ। भारतीय टीम को न सिर्फ स्पॉनसर्स मिलने शुरू हुए बल्कि विश्व क्रिकेट ने भी टीम इंडिया के दमखम को पहचाना। हॉकी के इस देश के युवा क्रिकेट की ओर आकर्षित होने लगे और आज टीम इंडिया विश्व क्रिकेट की महाशक्ति बन चुका है।
इसके बाद भारत 2003 विश्व कप फाइनल फाइनल में पहुंचकर खिताब नहीं जीत पाया। हालांकि 2011 में एमएस धोनी की अगुवाई में भारतीय टीम 28 साल बाद बाद दूसरी बार विश्व विजेता बनती है। अब देखना होगा कि क्या कप्तान विराट कोहली अपनी अगुवाई में 2019 का वर्ल्ड कप जीत पाएंगे।