किसी भी क्रिकेट मुकाबले में टॉस का बेहद अहम रोल होता है कई बार तो टीमें टॉस होने से पहले यह मनाती हैं टॉस उनकी ही टीम का कप्तान जीते। हालांकि कई बार टॉस अपने पक्ष में नहीं जाता।
टॉस जीतने वाली टीम के पास इस बात का सुनहरा मौका होता है कि वह पिच और मौसम का मिजाज देखकर पहले बल्लेबाजी या गेंदबाजी करने का फैसला ले।
लेकिन अब ऐसी संभावना चल निकली हैं जिसमें पांच दिन चलने वाले क्रिकेट के सबसे पुराने प्रारूप (टेस्ट मैच) से पहले टॉस किए जाने की परंपरा को ही खत्म कर दिया जाए, यानी कि टॉस ही नहीं कराया जाए। अगर ऐसा होता है तो टेस्ट क्रिकेट से टॉस इतिहास बन जाएगा। ऐसे में यह सवाल सबके जेहन में होगा कि पहले बल्लेबाजी करने का मौका किसे मिलेगा। इस समस्या का निजात भी ढूंढ़ लिया गया है।
टॉस खत्म किए जाने को उठने लगी है मांग
ऑस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान स्टीव वॉ ने हमवतन रिकी पोंटिंग और वेस्टइंडीज के पूर्व दिग्गज माइकल होल्डिंग की उस अपील का समर्थन किया है जिसमें टेस्ट मैचों में टॉस को खत्म करने की बात कही गई है।
इस अपील में कहा गया है कि टेस्ट सीरीज के दौरान मेहमान टीम को यह अवसर मिलना चाहिए कि पहले वह बल्लेबाजी करेगी या फील्डिंग ताकि मेजबान टीम को अपनी हिसाब से पिच तैयार कराने का एडवांटेज न मिल सके।
स्टीव वॉ ने कहा कि मुझे इसमें कोई हर्ज नहीं दिखता। यह कोई ऐसी खराब चीज नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर अधिकारी कुछ अन्य विकल्पों पर विचार करते हैं तो उन्हें इसमें कोई एतराज नहीं है। वेस्टइंडीज के पूर्व दिग्गज माइकल होल्डिंग ने भी टॉस की बहुत ज्यादा अहमियत होने के कारण ऐसे सुझावों का समर्थन किया था।
पिछले हफ्ते पोंटिंग ने विज्डन इंडिया के लिए एक कॉलम अब और टॉस नहीं के तहत लिखा था कि मेरे विचार से टॉस टीवी के हिसाब से ठीक है कि हर कोई जिज्ञासु होता है जब सिक्का हवा में होता है और यह जानने की उत्सुकता होती है कि विजेता कप्तान का निर्णय क्या होगा लेकिन अब यह सब प्रासंगिक नहीं लगता। अब समय बदल गया है अब हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि गेंद और बल्लेबाज के बीच संतुलित मुकाबला हो।
अब जिस तरह से टेस्ट क्रिकेट से टॉस को खत्म किए जाने की परंपरा को खत्म करने की मांग उठी है तो यह तुरंत तो खत्म होने नहीं जा रहा लेकिन एक आवाज उठी है तो इसका कुछ परिणाम तो आएगा ही।
क्यों सामने आया टॉस नहीं किए जाने का नया सुझाव?
पूर्व ऑस्ट्रेलियाई कप्तान रिकी पोंटिंग ने पिछले दिनों राय जाहिर कि टेस्ट मैचों में कोई टॉस नहीं होना चाहिए और मेहमान कप्तान को पिच के निरीक्षण के बाद यह फैसले करने की छूट होनी चाहिए कि उसकी टीम पहले बल्लेबाजी करेगी या नहीं।
अब सवाल उठता है कि यह सुझाव आखिर आया कहां से और क्या कारण है इसके पीछे। पिछले महीने एशेज सीरीज के दौरान इस तरह के सुझाव सामने आए जब इस तरह की रिपोर्टें आईं कि इंग्लैंड में हुई सीरीज के दौरान ग्राउंडसमैन को सपाट पिच तैयार करने के लिए कहा गया था जिससे मेहमान ऑस्ट्रेलियाई पेस अटैक निष्प्रभावी हो सके।
पूर्व कप्तान स्टीव वॉ बेशक टेस्ट मैचों में टॉस को खत्म करने के पक्ष में हों लेकिन उनका मानना है कि ऑस्ट्रेलिया की हार के लिए सिर्फ टॉस को दोष देना ठीक नहीं। उनकी नजर में इंग्लैंड की परिस्थितियों में ढलने में विफल रहने और खराब तकनीक इसके लिए ज्यादा दोषी हैं। आधुनिक क्रिकेटरों को हर हालात में बेहतर करने का हुनर होना चाहिए।