इन दिनों बीसीसीआई में टीम इंडिया के नए कोच के चयन को लेकर गहमा-गहमी तेज है। १० जुलाई को कोच के लिए आवेदन करने वाले खिलाड़ियों का सचिन तेंदुलकर, सौरव गांगुली और वीवीएस लक्ष्मण की सदस्यता वाली समिति इंटरव्यू करेगी। लेकिन इससे पहले एक नया विवाद सामने आ गया है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा बीसीसीआई के संचालन के लिए गठित कमेटी ऑफ एडमिनिस्ट्रेशन(सीओए) की सदस्य डायना एडूल्जी ने कहा कि अनिल कुंबले के कोच पद से इस्तीफा देने के बाद बोर्ड ने नए सिरे से कोच पद के लिए आवेदन मंगाए। बोर्ड ने सीओए को अंधेरे में रखा और इसके लिए अनुमति नहीं ली।
२४ जून को आयोजित बैठक में सीओए ने कोच के चयन के लिए नए सिरे से अावेदन करने के बीसीसीआई के निर्णय पर आपत्ति जाहिर की। सीओए की सदस्य डायना एडूल्जी ने मामले को बीसीसीआई के सीईओ राहुल जौहरी के सामने उठाया। उन्होंने कहा, सीओए को सूचित किए बगैर कोच पद के लिए आवेदन की तिथि बढ़ाए जाने का विज्ञापन क्यों प्रकाशित किया गया। जबकि क्रिकेट एडवाइजरी कमेटी को कुंबले के इस्तीफा देने के बाद पूर्व तिथि तक आवेदन करने वाले उम्मीदवारों में से कोच का चयन करना था।
उस वक्त तक कोच पद के लिए वीरेंद्र सहवाग, टॉंम मूडी, रिचर्ड पायबस, डोडा गणेश और लाल चंद राजपूत ने आवेदन दिया था। इसके बाद बीसीसीआई ने आवेदन की तिथि में बढ़ाई जिसके बाद रवि शस्त्री ने कोच पद के लिए आवेदन भेजने का निर्णय लिया। डायना के आरोप का जवाब देते हुए राहुल जौहरी ने तारीख बढ़ाए जाने की वजह स्पष्ट करते हुए कहा, उस वक्त तक अनिल कुंबले पद पर थे और कुंबले का नाम भी कोच पद की दौड़ में शामिल था। कई अच्छे उम्मीदवारों ने केवल इसलिए आवेदन नहीं किया था क्योंकि उन्हें कुंबले का कार्यकाल बढ़ाए जाने की संभावना नजर आ रही थी। जौहरी ने आगे कहा जितने ज्यादा लोग पद के लिए आवेदन करेंगे उतना ही बेहतर होगा। इसलिए बोर्ड ने यह निर्णय लिया।
इसके बाद डायना ने कहा कि उनकी आपत्ति दर्ज की जानी चाहिए जिसका समिति के अन्य सदस्यों ने भी समर्थन किया। इसके बाद सीओए ने सीएसी पर विश्वास जताते हुए कहा कि समिति क्रिकेट के बेहतरी को ध्यान में रखकर निर्णय लेगी। आश्चर्जजनक रूप से जिस दिन डायना ने मीटिंग में जो सवाल उठाया उसके बाद रवि शास्त्री ने अपनी दावेदारी पेश की। शास्त्री का नाम पहली लिस्ट में शामिल नहीं था लेकिन विराट कोहली की पसंद होने के कारण वह कोच पद की दौड़ में उतरे हैं।