वनडे विश्व कप का शानदार आगाज हुआ है। अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में खेले गए पहले मैच में न्यूजीलैंड ने डिफेंडिंग चैंपियन इंग्लैंड को नौ विकेट से करारी शिकस्त दी। पहले बल्लेबाजी करते हुए इंग्लैंड ने 50 ओवर में नौ विकेट गंवाकर 282 रन बनाए। जो रूट ने 77 रन की पारी खेली। जवाब में न्यूजीलैंड की टीम ने 36.2 ओवर में एक विकेट गंवाकर लक्ष्य हासिल कर लिया। डेवोन कॉन्वे ने 121 गेंदों में 19 चौके और तीन छक्के की मदद से नाबाद 152 रन और रचिन रवींद्र ने 96 गेंदों में 11 चौके और पांच छक्के की मदद से 123 रन की पारी खेली। यह दोनों का पहला वनडे विश्व कप है और इस टूर्नामेंट में अपने पहले ही मैच में दोनों ने कमाल कर दिया।
तीसरे नंबर पर बैटिंग करने आए रचिन
रचिन रवींद्र
- फोटो : अमर उजाला
इनमें सबसे ज्यादा तारीफ 23 साल के रचिन रवींद्र की हो रही है, जो कि एक ऑलराउंडर हैं। वह इंग्लैंड के खिलाफ नंबर तीन पर बल्लेबाजी के लिए आए, जो कि न्यूजीलैंड के नियमित कप्तान केन विलियम्सन की बैटिंग पोजिशन है। हालांकि, रचिन ने अपनी बल्लेबाजी से बिल्कुल भी विलियम्सन की कमी नहीं खलने दी। यह रचिन का 13वां ही वनडे मैच था और उन्होंने जिस परिपक्वता के साथ बल्लेबाजी की, उसे देखकर हर कोई हैरान रह गया। सबसे बड़ी बात तो यह है कि इस मैच के लिए रचिन की प्लेइंग-11 में जगह तक पक्की नहीं थी। न्यूजीलैंड की टीम लोकी फर्ग्यूसन के साथ उतरने वाले थे, लेकिन गुरुवार को उन्होंने चोट की जानकारी दी और मैच से ऐन पहले रचिन को बताया गया कि वह खेलने जा रहे हैं।
रचिन का ऑलराउंड प्रदर्शन
इसके बावजूद रचिन ने शानदार पारी खेली। सिर्फ बल्ले से नहीं गेंद से भी उन्होंने कमाल दिखाया और 10 ओवर में 76 रन देकर हैरी ब्रूक का महत्वपूर्ण विकेट झटका। रचिन ने अपने पहले विश्व कप मैच में ही कई रिकॉर्ड तोड़ दिए। वह अब न्यूजीलैंड के लिए वनडे विश्व कप में सबसे तेज शतक लगाने वाले खिलाड़ी बन गए हैं। उन्होंने 82 गेंदों पर शतक जड़ा। वहीं, कॉन्वे ने इस मैच में 83 गेंदों में शतक जड़ा। वह इस लिस्ट में दूसरे नंबर पर हैं। इससे पहले यह रिकॉर्ड गुप्टिल के नाम था। उन्होंने 2015 विश्व कप में बांग्लादेश के खिलाफ 88 गेंदों में शतक जड़ा था। यह रचिन के अंतरराष्ट्रीय करियर का पहला शतक भी रहा। वहीं, स्टीफन फ्लेमिंग ने 2007 विश्व कप में बांग्लादेश के खिलाफ 90 गेंदों में शतक जड़ा था और वह लिस्ट में चौथे नंबर पर हैं।
रचिन रवींद्र
- फोटो : अमर उजाला
इंग्लैंड के खिलाफ इस पारी के बाद सोशल मीडिया पर उनकी खूब चर्चा हो रही है। हर कोई जानना चाहता है कि आखिर रचिन का भारत से क्या कनेक्शन है और उनके इस अनोखे नाम के पीछे क्या कहानी है। आइए जानते हैं...
कौन हैं रचिन रवींद्र? कैसे पड़ा नाम?
सचिन और द्रविड़
रचिन रवींद्र का जन्म न्यूजीलैंड के वेलिंग्टन में 18 नवंबर 1999 को हुआ था। उनके पिता रवि कृष्णमूर्ति एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं। वह कर्नाटक के बेंगलुरु से ताल्लुक रखते हैं। 90 के दशक में रवि न्यूजीलैंड शिफ्ट हो गए थे और वेलिंग्टन में ही रचिन का जन्म हुआ था। रचिन के पिता रवि को क्रिकेट काफी पसंद है और वह भारतीय दिग्गज सचिन तेंदुलकर और राहुल द्रविड़ के बहुत बड़े फैन हैं। जब रचिन का जन्म हुआ तो रवि ने उनका नाम सचिन तेंदुलकर और राहुल द्रविड़ के नाम पर रखने का फैसला किया। उन्होंने राहुल के 'र' और सचिन के 'चिन' को मिलाकर नाम रखने का फैसला किया। इस तरह इस 23 वर्षीय क्रिकेटर का नाम रचिन पड़ गया।
2016, 2018 अंडर-19 विश्व कप का हिस्सा रहे
कम उम्र में ही रचिन ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर दिया था। उन्होंने पहले अंडर-19 क्रिकेट खेली और फिर नेशनल क्रिकेट टीम में जगह बनाई। उन्होंने इसी साल सितंबर में बांग्लादेश के खिलाफ टी20 अंतरराष्ट्रीय से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में डेब्यू किया था। वह 2016 अंडर-19 क्रिकेट विश्व कप और 2018 अंडर-19 क्रिकेट विश्व कप के लिए न्यूजीलैंड की टीम का हिस्सा थे। 2018 अंडर-19 क्रिकेट विश्व कप में वह उभरता सितारा के रूप में सम्मानित हुए थे। उन्हें लॉर्ड्स में भारत के खिलाफ विश्व टेस्ट चैम्पियनशिप फाइनल के लिए न्यूजीलैंड टीम में भी चुना गया था, लेकिन प्लेइंग इलेवन में जगह नहीं मिल पाई थी।
सचिन को अपना आदर्श मानते हैं रचिन
रचिन रवींद्र
- फोटो : सोशल मीडिया
रचिन ने एक इंटरव्यू में बताया था- मैंने चार वर्षों तक सर्दियों के दौरान आरडीटी (अनंतपुर, आंध्र प्रदेश) में प्रशिक्षण लिया है। महान सचिन तेंदुलकर को अपना आदर्श बताते हुए रचिन ने 2016 में कहा था- भारतीय क्रिकेट के दिग्गज सचिन की बल्लेबाजी शैली को सीखने की कोशिश की है। मेरी बल्लेबाजी के आदर्श सचिन हैं। जब मैं बहुत छोटा था तब से मैंने उन्हें देखकर सीखा है।