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जन्मदिन विशेषः इन 8 पारियों से लक्ष्मण बने 'वेरी-वेरी स्पेशल'

Thu, 01 Nov 2012 01:24 AM IST
अभिषेक कुमार/इंटरनेट डेस्क
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टीम इंडिया के वेरी-वेरी स्पेशल भले ही अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कह चुके हैं, लेकिन जब कभी उनका नाम जेहन में आता है तो उनकी यादगार पारियों की याद ताजा हो जाती है। 1 नवंबर को 38 बरस के हुए लक्ष्मण की पारियों के बदौलत कई मौकों पर भारत ने हारे हुए मैचों में जीत हासिल की।
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ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 167 रन (जनवरी 2000)
लक्ष्मण वैसे तो 1996 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण कर चुके थे, लेकिन 2000 में सिडनी के ग्राउंड पर उनके बल्ले से निकली 167 रनों की पारी के बाद दुनिया में उन्हें प्रसिद्घि मिली। ऑस्ट्रेलिया दौरे पर गई भारत की टीम पहले दो टेस्ट हार चुकी थी। तीसरे टेस्ट में ऑस्ट्रेलिया ने पहली पारी में भारत को 150 रन पर ऑलआउट करने के बाद अपनी पहली पारी 552/5 पर घोषित की। दूसरी पारी में ओपनिंग करने पहुंचे लक्ष्मण ने ग्लेन मैकग्रा, ब्रेट ली और शेन वॉर्न जैसे दिग्गजों की जमकर धुनाई कर दी। हालांकि भारत यह मैच हार गया लेकिन लक्ष्मण की बैटिंग की विपक्षी कप्तान स्टीव वॉ ने भी जमकर तारिफ की।

ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 281 रन (अप्रैल 2001)
ऑस्ट्रेलिया ने कोलकाता में पहले टेस्ट में टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करते हुए 445 रन बनाए और भारत की पहली पारी को 171 रन पर ऑलआउट कर भारत को फॉलोआन दिया। स्टीव वॉ एंड कंपनी टेस्ट मैचों में ऑस्ट्रेलिया की लगातार 16वीं जीत की पूरी उम्मीद लगाए बैठी थी। लेकिन तीसरे नंबर पर बल्लेबाजी करने उतरे वीवीएस ने राहुल द्रविड़ के साथ मिलकर उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। दोनों ने मिलकर दूसरी पारी में 376 रनों की साझेदारी की। इस तरह भारत ने दूसरी पारी 7 विकेट पर 657 रन पर घोषित की। द्रविड़ और लक्ष्मण की बदौलत ही भारत ने मैच में वापसी की और ऑस्ट्रेलियाई विजय रिकॉर्ड को रोक दिया। इस मैच में लक्ष्मण के बल्ले से निकली 281 रनों की पारी उस वक्त किसी भारतीय द्वारा टेस्ट मैच में सर्वाधिक व्यक्तिगत स्कोर था।
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ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 148 रन (दिसंबर 2003)
एडिलेड में खेले गए इस मैच में ऑस्ट्रेलिया के 556 रन बनाने के बाद भारत 85 रन पर चार विकेट खो चुका था। लेकिन पांचवें विकेट के लिए राहुल द्रविड़ के साथ मिलकर लक्ष्मण ने 303 रन पारी में जोड़े और भारत को 523 के स्कोर पर पहुंचाया। दूसरी पारी में भारत ने ऑस्ट्रेलिया को 196 रन के स्कोर पर आउट किया। इसके बाद भारतीय टीम ने 233 रनों के जीत के लक्ष्य को आसानी से हासिल कर लिया। अरसे बाद भारत को विदेश में टेस्ट जीत मिली और सौरभ गांगुली की कप्तानी वाली टीम इंडिया सीरीज़ में 1-0 से बढ़त हासिल की।

ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 178 रन (जनवरी 2004)
सिडनी के मैदान पर खेले गए सीरीज के चौथे और आखिरी टेस्ट मैच को सचिन तेंदुलकर की शानदार पारी के लिए याद किया जाता है। इस मैच में सचिन ने ऑफ-साइड पर बिना बाउंड्री लगाए नाबाद 241 रन बनाए थे। लेकिन इस मैच में लक्ष्मण ने सचिन का अच्छा साथ निभाते हुए 178 रन बनाए थे। भारतीय टीम के दो बेहतरीन बल्लेबाजों ने चौथे विकेट के लिए 353 रन बनाए और पारी को विशाल स्कोर 705 रन तक पहुंचाया।

पाकिस्तान के खिलाफ 107 रन (मार्च 2004)
2004 में भारत लंबे समय बाद पाकिस्तान के दौरे पर गया था। पांच मैचों की एकदिवसीय सीरीज के शुरुआती चारों मैचों में दोनों टीमें 300 के आंकड़े को आसानी से पार कर रही थी। लाहौर में खेले गए सीरीज के आखिरी और पांचवें मैच में पहले बल्लेबाजी करने उतरी भारतीय पारी लड़खड़ा गई। ऐसे समय में लक्ष्मण ने 107 रनों की पारी खेलकर जैसे-तैसे टीम का स्कोर 293 तक पहुंचाया। भारत ने इस मैच को 40 रनों से जीतकर सीरीज पर 3-2 से फतह हासिल की। साथ ही लक्ष्मण के बल्ले से निकली वनडे मैच में शतकीय पारी यादगार बन गई।

श्रीलंका के खिलाफ नाबाद 103 रन (अगस्त 2010)
कोलंबो के पी सारा स्टेडियम में खेले सीरीज के तीसरे टेस्ट की दूसरी पारी में भारत के मामूली 11 रनों की बढ़त को पार करते हुए श्रीलंका ने 267 रन बनाए। भारत के सामने जीत के लिए 257 रन का टारगेट था। भयंकर पीठ दर्द से पीड़ित लक्ष्मण ने नाबाद 103 रनों की हिम्मत भरी खेलकर टीम को जीत दिला दी।

ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ नाबाद 73 रन (अक्टूबर 2010)
मोहाली में खेले गए इस मैच की दूसरी पारी में 216 रनों का पीछा करते हुए भारत के 124 रन पर 8 खिलाड़ी आउट हो चुके थे। ऐसे समय में लक्ष्मण ने इशांत शर्मा सहित निचले क्रम के अन्य बल्लेबाजों के साथ छोटी-छोटी साझेदारियां कर ऑस्ट्रेलिया के हाथों से एक फिर मैच छीन लिया। पीठ दर्द होने के बावजूद लक्ष्मण ने नाबाद 73 रन बनाए और भारत को एक विकेट से जीत दिला दी।

द. अफ्रीका के खिलाफ 96 रन (दिसंबर 2010)
डरबन की उछाल वाली पिच पर जीतना भारत के लिए हमेशा ही एक सपना रहा। लेकिन लक्ष्मण ने दूसरी पारी में 96 रनों की पारी खेलकर इस सपने को साकार कर दिया। इस टेस्ट मैच की पहली पारी में भारत को 74 रनों की बढ़त मिली थी। लेकिन दूसरी पारी में मात्र 148 रन पर 7 विकेट खो दिए। ऐसी विषम परिस्थिति में लक्ष्मण ने निचले क्रम के बल्लेबाजों के साथ मिलकर भारत को निर्णायक स्कोर तक पहुंचाया। इस मैच में जहीर खान ने आठवें विकेट के लिए 70 रन बनाए। इस मैच में भारत ने 87 रनों की यादगार जीत हासिल की।
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